चाय के दुकानों पर की क्रांति (Revolutions at the tea stalls)

देखा है
चाय की दुकानों पर
रोज़ होती
क्रांतियों को,
प्रश्नचिन्ह लगते
शासकों पर,
विदेशनीति की
बखिया उधेरते
ज्ञानकुम्भों को,
सवालों की बेतरतीब
बौछार करते
नवयुवकों को,
और,
देखा है
उन क्रांतियों के उफान को
चाँद मिनटों में थमते हुए,
प्रश्नचिन्हो को पूर्णविराम बनते हुए,
ज्ञानकुम्भों का ज्ञान सूखते हुए,
और नवयुवकों का जोश
पानी बनते हुए,
ख़त्म होती हर प्याली के साथ।

Translation:

Revolutions at the tea stalls

I have seen
Those revolutions
Brewing at the tea stalls,
Those question marks
Branded on the faces of the rulers,
The intellectuals
Whipping the skin of
Foreign affairs of the nation,
Young men spraying
Questions relentlessly,
And,
I have seen
Those revolutions dying
In a matter of minutes,
Question marks
Turning into full stops,
Those intellect
Evaporating in thin air,
And youth
Going soft
With every sip of the tea.

0 thoughts on “चाय के दुकानों पर की क्रांति (Revolutions at the tea stalls)

  1. “काशी का अस्सी” में श्री काशीनाथ सिंह इसे “गांडू ग़दर” की संज्ञा देते हैं| ग़दर अर्थात क्रांति – ये गांडुओं की क्रांति है – गांडू जो सिर्फ बातें करते हैं, कुछ करते नहीं हैं|

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