थके हुए लोग

जब थक जायेगा देश
और थक जाएगी
ये झंडे उठाकर चलने वाली जनता
विद्रोह कर कर
और बंद हो जायेगा
रैलियों और महारैलियों में
आम लोगों का आना
और ख़ास लोगो का बुलाना
रुक जायेगा फेसबुक पर
समस्या समाधान
और लग जायेगा ताला
बाबाओं, नेताओं और तथाकथित नेताओं के बडबोलेपन पर
नहीं आएगा कोई ‘हेमलिन का पाइड पाईपर’
लेकिन फिर भी क्या
झूठी मनौतियों, झूठे वादे सुन सुन कर
सह सह कर
थकी हुई, निराश और हतोत्साहित
ये भीड़
नहीं चल देगी उस चट्टान के छोड़ की ओर
जिसके एक तरफ है अनन्त जमीन
और दूसरी तरफ एक अंतहीन खाई
और शुरू कर देगी फेंकना
चुन चुन कर, खींच खींच कर
उन सबको

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