फ्रेम में जड़ी यादें (Memories contained in a frame)

मेरी कविताओं का
अच्छा होना
और उनका होना मात्र ही
तुम पर निर्भर है
तुम्हारे होने से तो
मेरा जीवन भी
कविता का रूप ले लेती है
हर बात, हर अंग, हर चाल
तराशी हुई सी
अच्छी-सी
हो जाती है
और, जब तुम नहीं होते हो
तो तुम्हारी यादें
बन जाती हैं मेरी
बातों का विषय
वो यादें
जो खिड़की के पर्दों से स्नैः-स्नैः
निरंतर टपकती रहती हैं
अक्षय…
और मेरी आँखे थकती नहीं
उन यादों को देख देख कर
उंगलियाँ बढती हैं
उन्हें छू लेने को
धड़कन तेज़ हो जाती है
बावजूद इसके
कि वह तुम नहीं हो
और शायद कभी होगे भी नहीं
क्या ये मेरे दिमाग का
एक फजूल-सा तिकड़म है
या
एक सुन्दर-सा समय
जो बस
यादों की कैनवस पर
एक सुन्दर से फ्रेम में
जड़ा सा पड़ा है
मेरे घर के बैठक में
जो बार बार
तुम्हारे, हमारे
साथ होने की याद दिलाता रहता है
एक उम्मीद से देखता हूँ
कि
शायद तुम आओगे जरूर…

Translation:

Memories contained in a frame

The beauty of my songs
Or the mere existence of it
Is solely dependent
On you
Your presence around my being
Metamorphoses my whole life
In to a beautiful poetry
Every uttered word,
Every limb,
Each move
Becomes so polished,
Beautiful,
Perfect.
But when you are not around
Your memories
Become the subject of my thoughts
Those memories
Which drip down slowly
From the curtain of the windows
Unending…
And my eyes
Never get tired
Of the sight of those memories
My fingers reach out
To touch them
The heart starts thumping fast
Despite your absence
And perhaps you won’t ever
Will be here!
Is it just an unyielding enterprise
Of my brain
Or
A beautiful time
Which is captured
On the canvas of memories
And has been contained
In to a beautiful frame
On the walls of my drawing room
Which keeps on reminding me
Of your, and our
Togetherness
I look at it
With an expectation
That
You will surely return…

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