गुलामी

देखा है मेट्रो के डब्बों में कंपनी के लैपटॉप पर बेतरतीब चलती हुई उँगलियों को और वो कहते हैं गुलामी मिट गई दुनिया से   Translation: “Slavery” I have seen In the compartments of a metro train Fingers dancing ceaselessly On the keypad Of the laptops provided by the corporates And they say Slavery has […]

भूख और भगवान

वो आये अपने हाथों में बड़ी बड़ी थैलियाँ लेकर कुछ में कपड़े थे कुछ में खाना था कुछ में किताबें थीं हम भूखे थे हम नंगे थे हम इंसान थे हमसे कहा ‘बदल’ लो अपना भगवान और हमने ‘बदल’ लिया आखिर था तो मैं आदमी ही ना मेरे बच्चों की भूख से बड़ा मेरा भगवान […]

अनवरत

तुम्हारे अस्तित्व से उलझा ये मन रात में जब मेरी करवटों को धकेलता है तब तुम्हारे भूत का एक झोंका मेरी पीठ को सहलाता हुआ मेरी रीढ़ में घुसता है और मुझ तक पहुँचता है बिना रोक-थोक अनवरत… (When this heart of mine Entangled with your existence Pushes my restlessness in nights Then A zephyr […]

एक बार फिर

जब मेरी दुनिया ख़तम होती है और मैं भटकता हूँ उन वादियों में, उन जगहों पर जो यथार्थ से परे हैं, जो अवचेतन की उपज जैसी है बारिश की टपकती बूंदों में चमकते सूरज और शांत चाँद के रंग से रंगी उस वादी में जहाँ एक अजीब सा इन्द्रधनुष है जिसमे न जाने कितने तरह […]

Once More

As my world ends, And I wander in the Landscapes unknown, Territories beyond reality And beyond conscious In the falling droplets of rain On a landscape bleached in the Glowing sun Facing a calm moon, In the backdrop of a rainbow With numerous colours Reflected in the deep memories Of you holding my hand Dissolving […]