चाय के दुकानों पर की क्रांति (Revolutions at the tea stalls)

देखा है चाय की दुकानों पर रोज़ होती क्रांतियों को, प्रश्नचिन्ह लगते शासकों पर, विदेशनीति की बखिया उधेरते ज्ञानकुम्भों को, सवालों की बेतरतीब बौछार करते नवयुवकों को, और, देखा है उन क्रांतियों के उफान को चाँद मिनटों में थमते हुए, प्रश्नचिन्हो को पूर्णविराम बनते हुए, ज्ञानकुम्भों का ज्ञान सूखते हुए, और नवयुवकों का जोश पानी […]

फ्रेम में जड़ी यादें (Memories contained in a frame)

मेरी कविताओं का अच्छा होना और उनका होना मात्र ही तुम पर निर्भर है तुम्हारे होने से तो मेरा जीवन भी कविता का रूप ले लेती है हर बात, हर अंग, हर चाल तराशी हुई सी अच्छी-सी हो जाती है और, जब तुम नहीं होते हो तो तुम्हारी यादें बन जाती हैं मेरी बातों का […]

थके हुए लोग

जब थक जायेगा देश और थक जाएगी ये झंडे उठाकर चलने वाली जनता विद्रोह कर कर और बंद हो जायेगा रैलियों और महारैलियों में आम लोगों का आना और ख़ास लोगो का बुलाना रुक जायेगा फेसबुक पर समस्या समाधान और लग जायेगा ताला बाबाओं, नेताओं और तथाकथित नेताओं के बडबोलेपन पर नहीं आएगा कोई ‘हेमलिन का पाइड पाईपर’ लेकिन फिर […]

Panchkone Art Exhibition: Art is not always beyond us

Recently, I have visited one of the biggest art exhibitions in my life where young artists displayed their works. It was at Delhi and it cleared many myths I held regarding art exhibitions. Generally, people think art, classical music etc. are for the intellectual lot and they would not be able to comprehend it. It […]