I want to kiss you again

And I saw you Sitting in the corner Of that office room Thick glasses Over the eyes That expressed myriad emotions As we traversed on Telling stories after stories With every single movement Of the brows, the pupils, the dark balls Assisted by those lips Thin and vigorous Beautiful and full of life And vibrant […]

अच्छा है जी, तुम कवि नहीं हो!

अच्छा है जी, तुम कवि नहीं हो! अच्छा है कि कान बंद हैं तेरे आँखें देखना नहीं चाहती ये चमड़ी वो ठंढ महसूस नहीं कर रही है और अंदर की आग बस बुझने ही वाली है यहाँ के लिए तुम सही नहीं हो अच्छा है जी, तुम कवि नहीं हो! तुमने गुलाबी होंठों की बात […]

On the attack: Why I choose to abuse

Show Cause Notice incident पर आज एक स्कूल के दोस्त से बात हो रही थी। उसने मुझे ये कविता दी, जो आप सबके समक्ष रख रहा हूँ, हमेशा की तरह छद्म बुद्धिजीवियों से (और उनसे जिन्हें एक शब्द विशेष से नफ़रत है) निवेदन है कि वो न पढ़ें और न ही किसी के कान में […]

In my defence: Responsibility of a poet

  An old poem recited during a Kavi Sammelan (on a college campus) which invited a Show Cause Notice from the administration on the use of certain words. Here is a detailed description of the poem. Critical appreciation and interpretation of the ‘objectionable’ poem Title: कौन शर्मिंदा नहीं है? The title itself sets the tone […]

मेरा पहला प्यार: सचिन तेंदुलकर (My first love: Sachin Tendulkar)

सचिन आज लिमिटेड ओवर की क्रिकेट की आख़िरी पारी खेलकर चले गए। कल को टेस्ट और प्रथम श्रेणी से भी अलविदा कह देंगें। हमारी जितनी उम्र है तब से तेंदुलकर खेल रहा था और हमारे होश में आने से पहले से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने परचम लहरा रहा था। जब हम नये नये क्रिकेट विश्लेषक […]

ग़ुलाम अली लाईव (Ghulam Ali at Delhi)

तबलची की टिक-ठक और ग़ुलाम अली साहब के अलाप से शुरू हुआ कार्यक्रम। ‘ये पाँच मिनट मुझे दे दो और बाक़ी के सारे मिनट आपके’ के साथ खाँ साहब ने मंडली के साथ सुरों की फाइन ट्यूनिंग, साउंड चेक आदि किया। इस तरह के कार्यक्रमों की ख़ास बात ये होती है कि वो चिरकुटों, कूल […]