युवा प्रेम की महागाथा: संघर्ष उसे बताने की

  हमारे एक मित्र हैं मुदित कुचेरिया (सुरक्षा कारणों से नाम बदल दिया गया है) बहुत ही शांत स्वभाव के हैं। कई कार्यों में पारंगत होने के कारण विपरीत लिंग के लोगों में काफी लोकप्रिय हैं। जवान हैं, तंदुरुस्त हैं (हवा पहलवान की तरह, आइडेंटिटी पता न लगे इसीलिए तंदुरुस्त लिख रहा हूँ), और अत्यंत […]

Movie review: Anurag Kashyap’s That Day After Everyday

We have conditioned generations of women by saying them they were inferior physically and, in the process, we made them feel inferior mentally as well. Underestimating every achievement, colouring her walls pink and bringing them chocolate cakes, we made them look silly to make ourselves look better. And then, we say, “ Aah… that’s so girly…”

स्मज्ड काजल

उन सबको समर्पित जिनका काजल कभी न कभी फैला हो (और उन्हें भी जिन्होंने इसका लुत्फ़ उठाया): स्मज हो गया है जो तेरा काजल तेरी ख़ूबसूरत आँखों को कितना ख़ास बना देता है ये तू नहीं जानती! और जब तू उसे पोंछने को कलाईयाँ मोड़ कर उठाती है क़यामत ढाते चीक-बोन्स के थोड़ा ऊपर ओढ़नी […]

खोया हिस्सा

‘खोया हिस्सा’ कहाँ समझी तुमने वो पंक्तियाँ जो मैंने लिखी थीं तुम्हारे न होने पर तुम्हारी यादों ने पकड़ी थी मेरी ऊँगलियाँ और लिखवाए थे वो चंद शब्द। मैं ख़ाली मकानों में वीरान सड़कों पर नंगी भीड़ में हर जगह तुम्हारे पाँव की आवाज़ ढूँढता हूँ और ढूँढता हूँ अपने वजूद के उस हिस्से को […]

School of Free Thinkers starts its first discussion session with literature

Any start, small or big, is necessary. We made a start. Starts are necessary else we won’t reach anywhere if we sit and just think in our rooms. Starts take you places. Starts give you a chance to make changes. Starts make you rectify the mistakes of your past. And so we needed a start. […]

भड़वा डेमोक्रेट

हाय रे भड़वे डेमोक्रेट घिन आती है तेरी सोच पर जब सड़ाँध गंध मारती है तेरी गिरी सोच जब तू लगाता है तमाम प्रतिबंध हमारे जीने पर साँस लेने पर पकड़ाता है जब तू संविधान का वो चेप्टर जिसमें सिखाया जाता है आर्टिकल 19(1)(a) और फिर कहता है फाड़ कर फेंक देने को हमारी बातें, […]