Your brand of feminism is a badly disguised misandry, ma’am!

Isn’t it great that all of the greatest poets like Ghalib, Mir, Momin, Faiz, Firaq, Faraz, Zauq etc are dead as otherwise they would be called misogynists! Nowadays, you can’t be sure when these license distributors and wholesale dealers of feminism call you patriarchal, misogynist and sexist! Now calling woman’s body a temple, means patronising […]

लौंडा हँस रहा है खीं खीं खीं… पार्ट २

सॅर, एगो बात बोलें? आप वापस फेसबुक पर आए तो बड़ा बढियाँ लगा। सुनें कि नहीं साईं बाबा को भगवान बनने से मना कर दिया और मूरतिया भी हटा दिया। लोग बुरबक हैं का? आ ई धर्म संसद क्या होता है? कोई बाबा थे बोले कि इसकी पूजा मत करो। सर भगवान सर्टिफ़िकेट लेकर आते […]

आईस आईस बेबे… (On ALS Ice Bucket Challenge)

सब बात ठीक है। दुनिया भर में लोग ठंढा पानी या बर्फ़ के टुकड़ों के साथ वाला पानी माथा पर ढार रहे हैं। हमारे घर में फ्रिज़ नहीं है और माताजी कहती हैं कि चाहिए भी नहीं। सब्ज़ी खेत से आता है और पीने का पानी चापाकल से। ऐनी वे… एक बीमारी है ए एल […]

सारे जहाँ से अच्छा… (On Indian Independence Day)

मैं भी हो जाता हूँ, आप भी हो जाते हैं और कई बार तो फ़ैशन में पूरा का पूरा युवा वर्ग हो जाता है: राष्ट्रीय पर्वों के दिन सिनिकल यानि दोषदर्शी, निंदक… कुछ लोग कविताएँ ढूँढ लाते हैं धूमिल की, दुष्यंत की, या अपनी ही लिखी और ऐसी भर्त्सना करते हैं कि लगता ही नहीं […]

ज़िंदगी के तमाम सवाल और आत्महत्या

हास्य कलाकार महज़ एक कलाकार नहीं होता। वो समाज पर अपने ग़ुस्से को हास्य के रूप में प्रस्तुत करता है और उसे चलायमान रखता है। जब भी ऐसा कलाकार हमें छोड़कर जाता है तो सिर्फ़ कहने के लिए ही नहीं, बल्कि सच में, समाज का एक हिस्सा विलुप्त हो जाता है। सच है कि नए […]