गुरदासपुर में आतंकियों के मरने से हुए फ़ायदे 

गुरदासपुर में दस-पचास हज़ार के ख़र्चे में तीन आतंकी मार दिए गए। नहीं मरते तो बड़ी समस्या हो जाती! 1. बहस होती कि क्या आतंकियों का कोई धर्म होता है? 2. बहस होती है कि क्या आतंकी किसी देश के अल्पसंख्यक समाज से वास्ता रखता है? 3. पता करना पड़ता कि बेचारा आतंकी किन कारणों […]

गुरदासपुर: मानवाधिकार के झंडेबाजों के नाम

याद रखना इस हमले को। याद रखना बहुत ज़रूरी है। और भी ज़रूरी अगर पुराना वाला याद नहीं है। उन्हें याद रखने की ज्यादा ज़रूरत है जिन्हें कसाब की फाँसी पर आपत्ति थी। उन्हें याद रखना ज्यादा ज़रूरी जिन्हें संसद पर हमले करने के बाद दी गई फाँसी पर मानवता की याद आई थी। याद […]

Yakub Memon hanging: Dear intellectuals, you may have big words but…

The intelligentsia has once again started to sing a faint chorus regarding ‘miscarriage of justice’ in the case of hanging of Yakub Memon. The rationale given is he is from a religious minority. Is he? He is from the second largest religious majority. Logic provided is that he did ‘unwittingly’ facilitate the logistics and conspiracy […]

Pseudo-feminists’ fixation with sex and female liberation

I don’t quite understand how infidelity, kissing in open, having multiple divorces are ‘liberation’, ’empowerment’ and ’emancipation’ for women in India. I don’t quite get how the ‘failed, fragmented family and marriage system’ (yes I am using article ‘the’ and generalising) of West is looked upon as something divine and universal truth that must be […]

बाहुबली की जय!

बाहुबली देखी। आप भी देखिए। सीधी कहानी को कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है, ये इस फ़िल्म से सीखा जा सकता है। कोई महान संदेश नहीं है। कोई बनावटीपना नहीं है। खाटी दक्षिण भारतीय फ़िल्म के सारे ज़ायके आपको मिलते हैं इसमें। फ़ंतासी, डेथ-डिफाईंग हिम्मत, ग्रैविटी-शेमिंग स्टंट्स सब गुँथे हैं जो दक्षिण भारतीय सिनेमा में […]

नसीर साहब, इस्लाम पर फ़िल्म इसलिए नहीं बन सकती…

नसीरूद्दीन शाह ने कहा है कि ‘इस्लाम पर फ़िल्म बनाने की हिम्मत नहीं वॉलीवुड के फ़िल्मकारों में।’ मैं उन्हीं से ये जानना चाहता हूँ कि जिस देश में वंदे मातरम् गाने पर बवाल है, धोबी को धोबी कहने पर बवाल है, और क्रिटिसिज्म के नाम पर कबीर का ‘ता चढ़ी मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा […]

What if Internet is made free and available to every Indian?

As you all would have heard, few people control what we think through their ownership of media. The media in India, and around the world, is nothing but a kind of oligarchy which, being the veil of ‘serving’ the society, works tirelessly to work for the agenda of the ruling parties.  Internet, however, has emerged […]