धर्म, आस्था और नफ़रत 

एक मित्र हैं, फेसबुक पर, उन्होंने एक स्टेटस भेजा और मेरी राय माँगी। इसमें आस्था और नफ़रत की बात की गई थी कि हर वो काम जो आस्था के नाम पर होता है वो आस्था नहीं नफ़रत कराती है। मेरा जवाब: जैसा कि मार्क्स ने कहा था धर्म भीड़ के लिए अफ़ीम की तरह है। […]