सर्जिकल स्ट्राइक का दूसरा दिन: अपनी ख़ुशी और उन्माद में फ़र्क़ कीजिए

बिना टैंक उतारे, बिना अपनी सेना के जवानों को खोए भी वो सब हासिल किया जा सकता है जो अभी हमारे लक्ष्य पर है। इसीलिए, ख़ुश रहिए, उन्मादित मत होइए।

35-70 आतंकी को मारने में वक़्त तो लगा पर पाकिस्तान बिलबिला गया है!

बयानों के लगातार बदलने से, उसमें एकरूपता ना होने से ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान कितना हिला हुआ है। भारत सरकार ने ‘साम-दाम-दंड-भेद’ की चारों नीतियाँ अपनाईं और चारों स्तर पर सफलता पाई।

अभिव्यक्ति की आज़ादी, देशद्रोह का क़ानून और सरकारों की मनमानी

सरकार की आलोचना, उसका विरोध, उसपर लिखना-बोलना एक सशक्त लोकतंत्र का हिस्सा है। ये देशद्रोह नहीं, देशप्रेम है।

भारत-पाक युद्ध चाहने वालों, आप अपनी भावना पर पुल बनाना सीखिए

युद्ध जब अवश्यम्भावी हो जाये तब तो उसे टालना गलत है लेकिन वो अंतिम विकल्प हो तो बेहतर है। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण के साथ एक सोची-समझी रणनीति बनाना सबसे अच्छा है।

जिस बिहार को सठियाये काटजू पाकिस्तान को दे रहे हैं, 11% सैनिक उसी राज्य के हैं

आपको ये बात भी याद दिलाना उचित रहेगा कि उड़ी हमले में शहीद होने वालों में तीन बिहार के थे। भारतीय सेना में 11% लोग बिहार के हैं और हर साल एक लाख से ज्यादा बिहारी भारतीय सेना में भर्ती होने की परीक्षा देते हैं।

संवेदनाओं के शीघ्रपतन के दौर में बंगाली बाबा की ज़रूरत

आपकी संवेदनाएँ जो मरती हैं जहाँ आप ‘खोखले विकास के दावे’, ‘सभ्यता के पहले पड़ाव’, ‘मानवता की मौत’ आदि बातें लिखते हैं, वो आपके लिए मात्र एक कुतूहल है। ये एक रोमांच देता है आपको। ये हाइपोडर्मिक नीडिल आपके अंदर के सरकार (किसी की भी हो) को कोसने वाले कीड़े को भोजन देता है। यही कारण है कि आपकी संवेदना मरने के तीन दिन बाद फिर ज़िंदा होती है ताकि आप उसे फिर से मारने का दावा कर सकें।

पाकिस्तानी कलाकारों को यहाँ से भगाना जायज है क्योंकि ये बेग़ैरत हैं

अगर ग़ुलाम अली सीमाओं से परे हैं तो फिर आतंक के ख़िलाफ़ बोलने में मुँह में पान क्यों रख लेते हैं? राहत फतेह अली खान को एक बार तो कहना चाहिए कि जो हो रहा है सही नहीं है। फवाद खान ने क्या देश की आर्मी को कहा है कि अपने देश के आतंकी कैम्प का सफ़ाया करे?

तुम काले हो इसलिए ख़तरनाक हो और हम तुम्हें गोली मार देंगे

काले लोगों को पैदा ही नहीं होना चाहिए। अमेरिकी सरकार को कोई ऐसी दवाई बना लेनी चाहिए और हर काले मर्द और औरत को पिला देनी चाहिए जिससे की उन्हें बच्चे न हों। जब बात एक नस्ल के लोगों से पूरे तंत्र को दिक्कत होने से है तो काले लोगों को कंसन्ट्रेशन कैंप जैसी जगहों पर ले जाकर मारने से भी समस्या सुलझ सकती है।

चलो पाकिस्तानियों की कह के लेते हैं, और घुस के मारते हैं! मज़ा आ जाएगा…

जहाँ पाकिस्तान अपने देश में आई बाढ़ के लिए भी भारत को कोसता है, वहाँ क्या धमाके सच में शिया-सुन्नी झड़पों के हिस्से होते हैं? मैं तो अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों का ज्ञाता नहीं हूँ पर मुझे नहीं लगता कि भारत कभी भी चुप बैठता है। हाँ आपको पर्सनली ख़बर नहीं मिलती, वो बात अलग है। लेकिन इस बार लग रहा है कि एक-दो दिन में आपको पता लग जाएगा कि पाकिस्तान में क्या हुआ है।