चूँकि जेल प्रशासन से ग़लती हुई, इसलिए एनकाउंटर गलत है! वॉव, जस्ट वॉव…

बटला हाउस, इशरत, सर्जिकल स्ट्राइक आदि सब फ़र्ज़ी थे इनके लिए, उनका क्या हुआ? वैसे पुलिस ने अच्छा जोक मारा है इस पर: “जहाँ लोग फेक एनकाउंटर को कैमरे से शूट कर रहे हों वहाँ क्या फेक एनकाउंटर कर पाना संभव है?”

गाँव की दिवाली, गिफ़्ट, पटाखेबाजी और माताएँ

पटाखा फोड़ते देख मातओं के आँखों की ख़ुशी देखकर लगता है कि वही फोड़ रही हों। बीच बीच में ‘अभोगिया, सरधुआ, जुअनपिट्टा’ जैसी गालियाँ भी बरसाती हैं जब बच्चे रिस्क लेने लगते हैं।

जेएनयू में एक छात्र ग़ायब है, एक मर गया; हम ग़ायब पर चर्चा करेंगे…

कल सुबह मणिपुर का एक लड़का अपने कमरे से मृत निकाला गया। उस पर कोई चर्चा नहीं हो रही क्योंकि वो मणिपुरी है, और शायद वामपंथी गिरोहों के किसी काम का नहीं।

मुश्किल में फँसे दिल, बिज़नेस और देशभक्ति का मॉकटेल

आप अपना बिज़नेस देख रहे हैं जिसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं। सबको हक़ है। लेकिन इसके लिए देशभक्ति और मानवता का रीमिक्स राग मत अलापिए। अनुराग कश्यप को, प्रियंका चोपड़ा को, बरखा दत्त को, सगारिका घोष को… सबको हक़ है अपनी बात कहने का। लेकिन आप जिस जगह पर हैं वहाँ से मोदी को टैग करके जनता को उल्लू क्यों बना रहे हैं कि सरकार ने ऐसा किया? सरकार ने तो कभी कुछ कहा ही नहीं।

ऐ दिल है मुश्किल: अनुराग कश्यप जी आपसे बेहतर तर्क की उम्मीद थी

हमें अनुराग से उम्मीद थी कि उन्हें एक फ़िल्म और एक प्रधानमंत्री के शांति प्रयासों के लिए किए दौरे में अंतर का पता होगा। क्योंकि मुझे नहीं लगता अनुराग कश्यप इतने मूर्ख हैं कि वो ये कहकर बच लें कि ‘मैं तो मूर्ख हूँ, मुझे ये समझ में नहीं आता’।

नारी सम्मान और समान अधिकार की लड़ाई है तलाक़, हलाला, बहुविवाह की मुख़ालफ़त

क्या कारण है कि ऐसे पर्सनल लॉ को डिफ़ेंड करने वाले हमेशा मर्द ही होते हैं? क्या कारण है कि ऐसे पर्सनल लॉ वाले तमाम बोर्ड में महिलाएँ दिखती तक नहीं? टीवी के प्राइम टाइम शो में कितनी जगह बिना दाढ़ी और टोपी वाला मुसलमान दिखता है, बुरक़े में ही सही?