छात्र राजनीति: कॉन्ट्रोवर्सी की औलादें जो फेसबुकिया यूथ आइकॉन्स गढ़ती हैं

चाहे जिसको ये गरिया रहे हों, या जिसके साथ खड़े हों, इन्हें दोनों के ही बारे में कुछ भी नहीं पता। इनको पूछिए तो कहेंगे कि वहाँ ये पढ़ा, उसने मुझे बताया। बस इतना रीसर्च है, जिसमें दूसरा पक्ष जानने की जरूरत इन्हें नहीं होती।

NSFW: एकांकी: हमको चाहिए आजादी

अगर सुबह बताएगी तो हमारे कामरेड सब तो ‘विक्टिम शेमिंग’ में आगे रहते ही हैं। फिर बाबा लोग समझा देंगे कि एक बलात्कार पीड़िता को ये पितृसत्तात्मक समाज कैसे देखता है। शर्म के मारे मर जाएगी। फिर भी नहीं मानेगी तो उसको रंडी बनाकर बदनाम कर देंगे…

वामपंथियों! अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च

तुमने गाँजे, सेक्स और क्रांति के नाम पर बहुत दिन काट लिए। तुम्हारी क्रांति को हम क्रांति से काटेंगे।

प्रिय गुरमेहर जी, मीडिया आपके पिता को बेच रही है!

आप को ऐसे दिखाया जा रहा है कि आप अपने स्वर्गीय पिता की अर्थी से बनी बैसाखियों पर चल रही हैं। आप इसे क्यों नहीं नकार रहीं?

प्राइम टाइम २७: रवीश कुमार के लेटेस्ट सारगर्भित वचन का मतलब क्या है?

“मेरी हार होगी तो यही मेरी जीत होगी। जीत जाऊंगा तो उनकी हार होगी ही होगी।”

इसका मतलब क्या है? इतनी डीप फिलॉसफी दे रहे हैं, कहीं चोर की दाढी में तिनका वाली बात तो नहीं?

प्राइम टाइम २६: वामपंथियों की चतुराई; और रवीश कुमार की ‘आध्यात्मिक चुप्पी’

वामपंथियों की चतुराई; और रवीश कुमार की उनके ‘अपर कास्ट हिन्दू मेल’ भाई द्वारा नाबालिग़ दलित के बलात्कार आरोपी होने पर ‘आध्यात्मिक चुप्पी’

मातृभाषा दिवस पर ठेठी में फेसबुक लाइव: बोलियों को बचाईए, उन्हें बोलिए, लजाईए मत

उनके लिए जो मैथिली और ठेठी भाषा समझ सकते हैं। इसमें मैंने बात की है कि मातृभाषा (जो भी हो) उसको बचाना क्यों ज़रूरी है। कैसे उसे बचाया जाय।