चोर-चिरकुटों का हिन्दू राष्ट्र ऐसा ही होगा, इनको धोईए

फिर सबके बाथरूम में झाँकेंगे की पेशाब खड़े होकर कर रहा है, जनेऊ कान पर है कि नहीं, रोज़ नहाता है कि नहीं, रोज़ पूजा करता है कि नहीं…

गाय को लेकर सरकारी दोगलापन कहाँ तक ज़ायज है?

जब आप मोहम्मद को डिफ़ेंड कर सकते हैं तो गाय के साथ क्या दिक़्क़त है? जब ईशनिंदा के चक्कर में लोग जेलों में सड़ रहे हैं, तो फिर गौ हत्या पर कानून क्यों ना बने?

विश्व रंगमंच दिवस: जीवन की नाटकीयता और छिछले संवाद

हमारी पूरी ज़िंदगी दूसरे के जैसा बनने में, दूसरों के पास की चीज़ों को पाने में, दूसरों के विचार अपने नाम करके बोलने में, और दूसरों की सफल ज़िंदगी का पीछा करने में बीत जाती है। हमारा अपना क्या है, हम कौन हैं, इस सवाल का उत्तर बहुत कम लोग दे पाएँगे।

अवैध बूचड़खाने, योगी सरकार, इमोशनल ब्लैकमेल और कानून

ये तो वही तर्क हो गया कि मेरा पचास हज़ार कमाने वाला लड़का बलात्कारी निकला तो सरकार उसे जेल में डालने से पहले मेरा घर चलाने की व्यवस्था कर दे! सरकार ग़ैरक़ानूनी धंधा करने वालों को कोई नौकरी नहीं देती, ना ही ऐसा करने की ज़रूरत है। वो जुर्माना भरें, सज़ा काटें और फिर क़ानूनी प्रक्रिया के तहत नई दुकान खोलें।

भन्ते! वही प्रेम है

लेकिन,
प्रेम शायद मिनैण्डर का रथ है
जिसके अवयवों को नागसेन ने
अलग-अलग हटाकर पूछा था,
“महाराज! क्या ये रथ है?”
“क्या ये रथ है?”
“क्या ये रथ है?”

योगी आदित्यनाथ एक स्टेटमेण्ट है कुछ पॉलिसी के लिए, कुछ पार्टियों और सरकारों के लिए

दिक़्क़त तब होगी जब वो गुण्डागर्दी को बढ़ावा देगा, दंगे कराएगा और अपने जूते हवाई जहाज़ से मँगवाएगा।

प्रिय मनोज तिवारी ‘मृदुल’, नाम के अंत में ‘कटु’ लगा लीजिए

आपको नहीं ही गाना था तो आप एक शिक्षिका, वो भी एक महिला, वो भी आपसे आग्रह किया था, एक मुस्कुराहट के साथ, को सप्रेम वैसी ही मुस्कुराहट के साथ मना कर देते।

नाहिद आफ़रीन वाला ‘फ़तवा’, रवीश कुमार और वैसी ख़बरों से गायब ‘पड़ताल’

आपको हर बार गोयनका अवार्ड तो मिल जाता है लेकिन आपकी विश्वसनीयता संदिग्ध होती जा रही है। एक दिन आएगा जब टीवी पर सच में अँधेरा छा जाएगा और उस अँधेरे में आप टॉर्च लेकर ढूँढने से भी नहीं मिलेंगे।