जौन एलिया: बेतकल्लुफ़ी से गहरे सवाल पूछने वाला शायर

ज़िंदगी का ख़ालीपन, होने ना होने का उहापोह, आने-जाने की बेचैनी, किसी के ज़िंदगी में रहने या ना रहने की बेख़बर, एक बौखलाहट जीवन और जीने के ढर्रे को लेकर, ख़्यालों की एक बेतरतीबी कि कहीं प्रेमिका के होंठ काटने के मंसूबे और कहीं लाखों बोसे ले लो, मैं नहीं गिनता का एटीट्यूड, ये सब जौन की एक किताब में ही दिख जाता है।

सोशल मीडिया के दौर में प्रेस फ़्रीडम इंडैक्स एक चुटकुला है जिसे कोई नहीं सुनता

प्रेस तो बंद कमरे से निकल कर हाथों में आकर फ़्री हो गया है सोशल मीडिया के दौर में। इस सत्य को स्वीकार लें मीडिया के मठाधीश, तो ऐसे रिपोर्ट आने बंद हो जाएँगे।

गाय के लिए आधार कार्ड: हेडलाइन में गाय और आधार देखकर कूदो मत

गाएँ तो भारत में बाज़ारों में बम लगाती हैं, इसीलिए उनसे घृणा करना ज़रूरी है। देश की सारी समस्या हिन्दुओं और उनकी गायों को लेकर ही है। अतः हिन्दू धर्म को बैन कर देना चाहिए और गायों से बनने वाले हर उत्पाद को खाना त्याग देना चाहिए।

साहित्य में एनकोडिंग होती है, होनी चाहिए, नहीं कर पा रहे तो मत लिखिए

जो लेखक कल्पना को, भावनाओं को, अपने समय और पात्रों के चिंतन में गूँथता है, उसको डीकोड करने के लिए आपको इतिहास, मनोविज्ञान दोनों की समझ होनी चाहिए।

किसान कौन हैं? क्या करते हैं ये लोग?

किसान वो है जिसको देश के मैनुफ़ैक्चरिंग बूम के लिए मज़दूरों की ज़रूरत पड़ने पर ऐसा मजबूर किया जाता है कि वो अपनी ज़मीन छोड़कर सर पर ईंट ढोता नज़र आता है; वो दस बटा दस के कमरे में दस आदमी के साथ सोता है क्योंकि देश के इन्फ़्रास्ट्रक्चर को मज़दूर ही तो बनाएँगे!

पोर्न, ब्रा का स्ट्रैप, स्कर्ट की लंबाई ही समाज को बर्बाद करती है

सत्तर साल की दादी और तीन साल की बच्ची के फ़िगर में क्या होता है जो उनका बलात्कार होता है? साड़ी, सलवार सूट, पोल्का डॉट वाले फ़्रॉक में कितनी चमड़ी दिखती है कि उनका बलात्कार हो जाता है?

कर्नल पुरोहित और सैफ्रन टेरर: जिन्हें भगवा आतंकवाद दिखता था वो कहाँ हैं?

हिटलर ने कहा था कि एक झूठ बोलो, उसे सीधा रखो, उसे बार-बार बोलते रहो, और अंततः लोग उसे सच मान लेंगे। कर्नल पुरोहित और सैफ्रन टेरर का वही हुआ।