आप गलत को गलत कहिए, हम ज़रा धर्म-जात-राज्य पता कर लें…

ग़लती किसने की है, क्या इस भीड़ के सर पर टोपी है, क्या इस भीड़ के खड़े होने की जगह बंगाल या कश्मीर तो नहीं, अगर चुनाव है तो उसकी जाति निचली है कि नहीं। उसके बाद इनकी संवेदनाएँ जगती हैं।

प्रिय ट्विंकल खन्ना जी, खुले में शौच करते व्यक्ति का उपहास मत कीजिए

बहुतों के लिए बाहर में शौच करना चुनाव नहीं, अभाव है। किसी को भी बदबूदार पब्लिक टॉयलेट की लाइन में खड़ा होना आनंददायक नहीं लगता।

बस इसलिए शराब में मेरी दिलचस्पी नहीं रही

अपने दो घंटे के मज़े के लिए किसी घर में एक पिटती पत्नी, इस हिंसा से त्रस्त होकर खुद को मारने की योजना बनाते किसी बेटे और जिंदगी भर के लिए सहमी हुई किसी बेटी को छोड़ दिया है।

प्राइम टाइम: बाढ़ आती है तो आए, लेकिन सरकारों को फ़र्क़ क्यों नहीं पड़ता?

समाधान क्या है? हर साल क्यों? तैयारी क्यों नहीं है? बाढ़ आती है तो आए, जानें क्यों ले जाती है?

उनके नाम जिन्होंने नारीवाद को पीरियड्स के धब्बों के फोटो तक सीमित कर दिया है

ऐसे लोग ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर, फेसबुक आदि पर ही कैम्पेन चलाते हैं और उनके लिए वो रास्ता सबसे सही होता है जो सबसे छोटा होता है।

स्वतंत्रता दिवस के मायने: सवाल कीजिए लेकिन सम्मान के साथ

आशाएँ बहुत जल्दी बदलती हैं, देश को बनने में समय लगता है। देश को बनने दीजिए। इस आज़ादी के दिन का सम्मान कीजिए। अपने सवालों में विचार लाइए।