कर्णाटक चुनाव: जब अनैतिक लोग नैतिकता की आशा करने लगें तो समझो ग़ज़ल हुई

आप जो माँग रहे हैं वो धूर्तता है। आपकी बेचैनी दिखती है क्योंकि आप जिस विचारधारा को पालते रहे हैं, उसकी सारी मक्कारी जनता पकड़ रही है। आपकी मक्कारी हमारे जैसे लोग पकड़ रहे हैं क्योंकि आपको विकास या आदर्श से कोई लेना-देना नहीं है। आप कार के पीछे भागते गली के वो कुत्ते हैं जिसे ये भी नहीं पता कि उसे कार से उतरकर आदमी पूछ ले कि क्यों भौंक रहा है तो वो क्या जवाब देगा। और तो और, उसे दो बार पुचकारकर बिस्किट फेंक देगा तो वो कार में बैठकर पैर चाटता उसके घर पहुँच जाएगा।

बंगाल चुनावी हिंसा: रवीश जी ने नाक में काग़ज़ की सीक डालकर छींका, किया इज़ इक्वल टू

पूरे आर्टिकल में प्रदेश की मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं लिया गया है। उस सांसद का नाम नहीं लिया गया है जिसने इस हिंसा के आँकड़े को सामान्य बताया है। क्यों? ट्रेन में बिकते जनरल नॉलेज की किताब में ‘कौन सी चिड़िया उड़ते हुए अंडे देती है’ के बाद वाले पन्ने पर ‘राज्य और मुख्यमंत्री’ वाले हिस्से में बंगाल की ममता का नाम नहीं छपा है क्या?

‘अवेन्जर्स: इनफ़िनिटी वार’ एक दर वाहियात फ़िल्म है, पायरेटेड भी न देखें!

ये आपको भावनात्मक स्तर पर कहीं से नहीं छूती क्योंकि मानवों के होने के बावजूद ये देश, दुनिया, ग्रह, नक्षत्र, सौर परिवार, गेलेक्सी बचाते-बचाते मानवों की समझ के हद से बाहर चले गए हैं।

झारखंड रेप-हत्या कांड: इन गाँवों के लोग किस दुनिया में रह रहे हैं?

क्या दलित द्वारा दलित का बलात्कार और हत्या से शर्मिंदगी नहीं होनी चाहिए? क्या वो शर्मिंदगी और क्रोध सिर्फ़ हिन्दू-मुसलमान, दलित-सवर्ण वाले मामले में ही लागू होता है?

रवीश जी का हर झूठ टायटेनियम है, उसकी ढाल बनाकर उनको कैप्टन भारत बन जाना चाहिए

जब आपको मोदी लगता है कि बातों को छुपा रहा है, तो क्या उसके विपक्ष में खड़े हर नेता की रैली में आदर्श लोग आदर्श बातें कर रहे हैं जिनका कुर्ता पूरा सफ़ेद है?

रवीश ने धर लिया: मोदी ने बस 99.9995% गाँवों में ही बिजली पहुँचाई!

मंशा क्या होनी चाहिए और क्या है। सत्तर साल बाद हर गाँव में बिजली पहुँची ये देश के लिए अच्छी बात है। कुछ गाँवों में नहीं पहुँची इसका मतलब उन गाँवों के अधिकारियों ने गलत सूचना पहुँचाई, या 0.0005% (या चलिए ऐसे सौ गाँव और ले लीजिए, फिर भी 18000 पर भी 0.55% होगा) रह जाने के बावजूद मोदी ने कहा सौ प्रतिशत में पहुँच गया। मतलब मोदी को कहना था कि ‘मितरों! बिजली 99.9995% गाँवों में पहुँच गई!

पत्रकारिता के गिरते स्तर में ज़्यादा ज़िम्मेदारी किसकी?

मीडिया का काम सत्ता की आलोचना तक ही सीमित नहीं है। मीडिया का एक काम सूचना पहुँचाना है, और एक काम विवेचना है। विवेचना और चर्चा सिर्फ नाकामियाँ और खोट गिनाने के लिए नहीं होती, न ही सिर्फ हर बात को देवत्व के स्तर पर ले जाकर बताने के लिए होती है। जहाँ सत्ता सही कर रही है, जिस अनुपात में कर रही है, उसी अनुपात में आलोचना और विवेचना होनी चाहिए।