अच्छा, देश के युवा का मूड पता चल गया लेकिन आगे क्या?

ये तो हमारे, आपके डर को ज़ायज ठहराते हैं कि हाँ, यहाँ आतंकियों की नर्सरी है, और जो बम नहीं बना रहे, जो जंगलों में अपने ‘साथियों’ की लाशों के पेट में बम नहीं छोड़ रहे ताकि वो मरते हुए भी दस-पाँच आम सरकारी मुलाजिम को मार दे, जो अपने साथ की महिला काडरों को सेक्स स्लेव नहीं बना रहे, वो सब मानसिक समर्थन ज़रूर दे रहे कि जो वो कर रहे हैं वो सही कर रहे हैं।

फ़िल्म समीक्षा: विवेकशील निर्देशक बताता है कि ‘स्त्री’ की कहानी स्त्री की कहानी है

वेश्या के प्रेम की बात, उसकी शादी की बात और फिर गाँववालों द्वारा एक तरह की ऑनर किलिंग की बात को, उसी गाँव के कुछ बच्चे जो अगली पीढ़ी के हैं, संवेदना के साथ सुनते हैं और सकारात्मकता के साथ चर्चा करते हैं कि जो हुआ वो गलत था। ये एक अच्छी कहानी और निर्देशन का द्योतक है।