उनके नाम जिन्होंने नारीवाद को पीरियड्स के धब्बों के फोटो तक सीमित कर दिया है

ऐसे लोग ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर, फेसबुक आदि पर ही कैम्पेन चलाते हैं और उनके लिए वो रास्ता सबसे सही होता है जो सबसे छोटा होता है।

स्वतंत्रता दिवस के मायने: सवाल कीजिए लेकिन सम्मान के साथ

आशाएँ बहुत जल्दी बदलती हैं, देश को बनने में समय लगता है। देश को बनने दीजिए। इस आज़ादी के दिन का सम्मान कीजिए। अपने सवालों में विचार लाइए।

सिनिकल लोग संवेदनशील होने का शॉल ओढ़कर मुद्दों के मज़े लेते हैं

सरकार तो यही चाहती है कि एक नेता बेहूदा बयान दे दे, लोग उसी में उलझे रह जाएँ कि क्या बकवास बोलता है। आप लोग हमेशा इसी में उलझकर रह जाते हैं।

आत्महत्या हत्या नहीं, आत्मज्ञान का मसला है

जिंदगी को ख़त्म करना या तो एक प्रबुद्ध व्यक्ति के सवालों का अंतिम निष्कर्ष है, या फिर मानसिक रूप से रोगी व्यक्ति के द्वारा खुद पर लाई गई एक दुर्घटना।

हामिद अंसारी मुसलमानों के नेता नहीं, अंजेडाबाजों का मोहरा बनकर गए

डिसाइड कर लो कि ‘असुरक्षित महसूस कर रहे हो’ या परशुराम टाइप ‘पंद्रह मिनट के लिए पुलिस के हटते ही हिन्दुओं को काटकर हिन्दुस्तान को इस्लामिस्तान बना लोगे’।

श्श्शऽऽऽ… हिन्दी के नवोदित साहित्यकार सो रहे हैं!

हमारे दौर के साहित्यकार अंदर से मरे हुए हैं, नाम के भूखे हैं, और हीनभावना से ग्रस्त हैं। इनकी लेखनी को दीमक चाट गया है, और दिमाग तो गलकर कान के रास्ते रिस-रिस कर बह ही चुका है।