‘सेकरेड गेम्स’ एक बोरिंग, प्रेडिक्टेबल और दोहराव वाली सीरीज़ है

समीक्षकों को अनुराग कश्यप, नवाज़ुद्दीन और राधिका आप्टे का नाम सुनकर ही चरमसुख प्राप्त होने लगता है। मतलब ये है कि ये लोग कहीं भी हों तो ऐसे चिरकुट समीक्षकों को लगता है कि एक मार्टिन स्कॉर्सेजी है, दूसरा जैक निकॉल्सन और तीसरी मेरिल स्ट्रीप। जबकि ये लोग उनकी एक बहुत बुरी फ़ोटोकॉपी भी नहीं कहे जा सकते।

ढाई लोगों का विचार है कि भारत स्त्रियों के लिए सबसे ख़तरनाक देश है

इन एक्सपर्ट्स के एक्सपर्टीज़ का दायरा कितना व्यापक है कि इन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, आर्थिक संसाधन, सांस्कृतिक या परम्परागत प्रथाओं, यौन हिंसा और छेड़-छाड़, दूसरे तरह की हिंसा और मानव तस्करी जैसे सारे विषयों पर अपनी राय रखी है।

आत्माओं के एकरूपता की अभिव्यक्ति है प्रेम

ज़रूरी नहीं कि दो ‘परफ़ेक्ट’ लोग ही प्रेम करें या फिर प्रेम में लोग परफ़ेक्ट हो जाते हैं। बिलकुल नहीं। दो बिखरे हुए लोग, दो चोर, दो असफल और गिरे हुए लोग भी प्रेम करने में सक्षम हैं।

ग़ुलामी के प्रतीकों पर गर्व करने वाली अकेली प्रजाति भारतीय ही है

कुल तीन पन्नों में आपको गुप्त वंश, मौर्य वंश, चोल, पांड्य, चेर, सातवाहन आदि को पैराग्राफ़ दे-देकर समेट दिया जाता है। बताया जाता है कि हम पर बलात्कार करने वाले और तलवार की नोक पर मुसलमान बनाने वाले आतंकी राजाओं के साम्राज्य में सूर्यास्त नहीं होता था और फलाना आदमी कितना महान था!

वामपंथी नेतृत्व चुने हुए प्रधानमंत्री को बम से उड़ाकर लोकतंत्र को बचाना चाहता है!

अगर ये लोग दलितों और आदिवासियों के हिमायती हैं तो ऐसे राज्यों और इस देश में उनकी सरकार क्यों नहीं बनती? देश में तो तीन-चौथाई आबादी दलितों और आदिवासियों की ही है, इनके सांसद विलुप्तप्राय प्रजाति क्यों हो गए हैं?

‘ठंढा आ रहा है’ वामपंथी आतंकी पिल्लो, कोंकियाओ और नए नैरेटिव गढ़ो

तुम्हारा ट्रेडिशनल आर्गुमेंट और वोटबैंक दोनों ही तुमसे भाग रहे हैं क्योंकि इस सरकार ने तुम्हारे आर्गुमेंट को भी तोड़ा है, और वोटबैंक को भी। दोनों को अपने काम से। चूँकि आँख में घोड़े का बाल और बवासीर वाले पिछवाड़े में गुस्से से तुमने कैक्टस डाल रखा है तो तुम्हें नहीं दिखेगा कि सड़के बनीं, गैस सिलिंडर मिले, फायनेंसियल इन्क्लूजन हुआ, इकॉनमी की हालत बेहतर है, टैक्स देना सहज हुआ, एक करोड़ नए कर दाता जुड़े, तुम्हारे चाचा द्वारा दिए गए लोन को लेकर भागने वालों पर कार्रवाई हो रही है…

पर्दाफ़ाश: ईवीएम का शिंजो अबे कनेक्शन; हैक है, हारना एक नौटंकी है

वीवीपैट में मोदी ने जापानी तेल लगा हुआ काग़ज़ लगाया है जो कि तीन सेकेंड तक आपको एक सिंबल दिखाएगा जिस पर आपने वोट किया है, और फिर वो कमल में बदल जाएगा क्योंकि हवा में आते ही टेम्पररी इंक गायब हो जाता है। कभी गौर से वीवीपैट मशीन देखी है? वो ढका क्यों रहता है? क्योंकि उसमें अंदर में जापानी तेल रहता है।

मेरठ एक्सप्रेस-वे का सच: यूपीए सरकारों ने सबसे ज़्यादा काम किया

पाँच साल और बनने में लगते तो कॉस्ट थोड़ा और बढ़ता और कितने लोगों को ज़्यादा दिन काम करने का मौक़ा मिलता। आप कहेंगे कि वो मज़दूर कहीं और काम करेंगे! अरे! कहीं और कैसे काम करेंगे? रोज़ सड़कें थोड़े ही बनती हैं। उसको इतनी जल्दी बनवाया जाता रहा, तो कितने लोगों के पास काम नहीं रहेगा।

मेरा समर्थन भाजपा या मोदी को क्यों है?

ऐसे लोगों के बीच तमाम ख़ामियों के बावजूद अगर भाजपा लगातार लोगों का विश्वास जीत रही है तो मुझे उस बहुमतदायिनी जनता के फ़ैसले पर सवाल करने का कोई हक़ नहीं क्योंकि वही रास्ता संवैधानिक है। जो भी ज़्यादा वोट लाएगा उसकी नीतियाँ सही हैं। सारी नीतियाँ सही न हों, पर लोग लार्जर पिक्चर देखते हुए उसे चुन रहे हैं।

हिन्दुओं का नरसंहार करने वाले रोहिंग्या को भारत में शरण क्यों?

इस्लामी राष्ट्रों को आगे बढ़कर इन मुसलमान शरणार्थियों को, बंग्लादेशियों के साथ अपने यहाँ बसाना चाहिए। या फिर यूएन को कुछ जगहों पर इनके रहने खाने की व्यवस्था करनी चाहिए। ये व्यवस्था वहाँ होनी चाहिए जहाँ संसाधनों की प्रचुरता हो, जनसंख्या की कमी हो, वर्कफोर्स की ज़रूरत हो।