अपने सवालों का हल असफल मानवों के साहित्य में ढूँढना

हम वो हो जाना चाहते हैं जो कोई और था। व्यक्ति अपने अनेक वातावरणों से ली गई हवाओं के ख़ून तक में संचारित होने से वो बनता है जो वो बन जाता है। हमारा दौर, पहले के तमाम दौरों की तरह, मिश्रित और बनावटी वास्तवकिताओं का दौर है। सूचनाएँ आती हैं, जाती हैं, हम उनके हिसाब से, उन्हें प्रोसेस करते हुए खुद को उनके अनुरूप, विपरीत, या निरपेक्ष रहते हुए व्यक्तित्व में बदलाव लाते, या नहीं लाते हैं।

यात्रा वृत्तांत: मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जीवित स्मारक हैं इतिहास के

मॉस्को जाएँ तो दिन में तो पैदल चलें ही, रात में तो ज़रूर ही चलें। रात में ये शहर एक अलग ही तरह के रंग में दिखता है। क्रिसमस और नववर्ष की तैयारी में एलईडी लाइटों से सजाया हुआ शहर एक अलग छटा बिखेरता है। शहर के बीच, नदी में इमारतों के रंगों से नहाए हुए प्रतिबिम्ब एक बेजोड़ अहसास देते हैं।

हर तीसरे दिन उठते जातीय बवंडरों का हासिल क्या है?

ये सारी बातें हुई नहीं, व्यवस्थित तरीक़े से हुईं। इसमें दुर्घटना को मुद्दा बनाया गया। डर का माहौल बनाया जाता रहा, ये कहकर कि डर का माहौल है। ये इतनी बार कहा गया, कि जो अपने बग़ल के गाँव में ईदगाह तक जाता था, वो अपने गाँव में मुसलमानों को दुर्गा पूजा के मेले में शक की निगाह से देखने लगा।

मॉस्को नाइट: वरजिन्स मेन्स क्लब जहाँ लोग ऑर्गेज्म ख़रीदते हैं

गणिकाओं, नगरवधुओं और वेश्याओं वाले रेड लाइट इलाक़ों से पटे पड़े देश में, इसे अनैतिक नहीं माना जाना चाहिए। मेरे लिए एक स्ट्रिपर शरीर की मदद लेती है, जैसे एक नेता अपने मुँह का, वैज्ञानिक अपने दिमाग का, या एक शिक्षक अपने विषय के ज्ञान का। जिसके पास जो है, उसका प्रयोग करते हुए, किसी की ज़रूरतों को पूरा कर रहा/रही है।

मॉस्को नाइट: पापा’ज़ बार में ‘यू आर जॉनी डेप’ एवम् ‘मेरे पास तेल का कुआँ होती’

बार में डीके को मिली यूक्रेन की लड़की बाद में डीके की मित्र बन गई और शराब का नशा उतरने के बाद भी उसने कॉल किया, और मिलने आई। ये अपने आप में एक अच्छी बात थी। आगे क्या हुआ, वो यहाँ बताने में मुझे लज्जा आती है।

ये टूजी फ़ैसला मोदी की सरकार को तबाह कर सकता है

जो पार्टी और पत्रकार स्पेशल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में २२ साल चले मुकदमे के फ़ैसले के बाद भी एक अंतिम प्रयास के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा सुबह के चार बजे खुलवा लेते हैं, वो इस मामले में सबसे निचली अदालत के इस फ़ैसले पर कि सबूतों के अभाव में बरी किया जाता है, ख़ुशियाँ मना रहे हैं और विन्डिकेटेड फ़ील कर रहे हैं! ये एक सुखद आश्चर्य और मनोरंजक क्षण है।

अंधा कानून लुच्चा हो जाता है; सरकारों में नेता होते हैं, और नेता एक ही ब्रीड के होते हैं

सरकारों को पता है कि सरकारें परमानेंट नहीं हैं। आज हैं, कल नहीं, परसों फिर हैं। मोदी को पता है भारत कॉन्ग्रेस मुक्त नहीं होगा। घोटालों में इसी कारण से अंधा कानून लुच्चा भी नज़र आने लगता है। कोई भी देश किसी भी पार्टी से मुक्त नहीं हो पाती।

गुजरात चुनाव समीक्षा: कॉन्ग्रेस ईवीएम, ‘भाजपा को 150 नहीं मिले’ के पीछे नहीं छुप सकती

कॉन्ग्रेस नया राहुल ‘दिखा’ तो पाई, लेकिन वो ‘नया’ क्या है, ये कभी ‘बता’ नहीं पाई। पार्टी के दफ़्तर में इस पर पटाखे खूब छूटे कि वो अध्यक्ष बनने वाले हैं लेकिन इससे किसी गुजराती वोटर को क्या फ़र्क़ पड़ जाएगा ये पता नहीं चला। छवि की बाहरी रूपरेखा सबने देखी, भीतरी विजन क्या था, ये बाहर नहीं आया।

रवीश कुमार सरीखे लोग स्टूडियो से रैलियाँ करना कब बंद करेंगे?

जब बिल अगस्त से ही आपके पास में है, तो चुनाव के दो दिन पहले इसे बिना पढ़े और अपने मन की बातें लिखकर पब्लिक के सामने रखने की क़वायद के पीछे की मंशा क्या है? आपके पास तो चार महीने थे, तब इस ख़बर पर विवेचना और चर्चा क्यों नहीं हुई? आखिर ये मीडिया हिट जॉब नहीं तो फिर क्या है?

अय्यर अभिजात्य रंगभेद के पर्याय हैं, ये ‘उड़ता तीर’ राहुल की जनेऊ काट देगा

आप गाली दीजिएगा, वो उसे कोट पर मेडल बनाकर चिपका लेगा, और कहता फिरेगा कि देखो ये कितना बड़ा अचीवमेंट है।