गौण मुद्दों के दौर में आपातकाल का हर रोज आना दोगलई का चरम है

जब मोदी इतना शक्तिशाली है ही, और वो मीडिया को दबा ही रहा है तो सबसे पहले तो ज़्यादा भौंकने वाले कुत्तों के मुँह पर जाली लगा देता, लेकिन कोई भारत में तो कोई वाशिंगटन पोस्ट में तमाम बातें लिख रहा है जो वो लिखना चाहता है।

स्त्री शरीर, नारी की देह, और सैनिटरी पैड्स

ये मसला स्वास्थ्य का है, बुनियादी है, स्त्री शरीर का है, ‘नारी की देह’ या आधुनिकता का नहीं। ‘नारी की देह’ कविता है, स्त्री शरीर स्वास्थ्य का मामला है। कविता और बेडशीट की तस्वीर इसे मॉडर्निटी से जोड़ने की बेकार कोशिशें हैं।

ओह राहुल! कम इनसाइड मी… : क्विंट, स्क्रॉल, वायर, स्कोडा, लहसुन

कॉन्ग्रेस के साथ आने को इच्छुक पार्टियों को भी ये दिखाना ज़रूरी था कि उनका नेतृत्व ‘गले पड़ने’ के बाद आँख मारकर दाँत निपोड़ने वाला डिम्पल्ड क्यूटीपाय है, न कि उनसे बेहतर क्षमता और समझ वाला व्यक्तित्व।

टॉक टू अ मुस्लिम: आख़िर मैं मुसलमानों से बात क्यों करूँ

कभी ये हैशटैग क्यों नहीं चलाते कि ‘टॉक अबाउट इस्लामिक टेररिज्म’? इस पर मुसलमानों के सेमिनार, पैनल डिस्कशन, चर्चा, विचार गोष्ठी, टीवी डिबेट आदि क्यों नहीं होते? और जब कोई हिन्दू या दूसरे धर्म के लोग चर्चा करेंगे और ‘इस्लामी टेरर’ शब्द पर ऐसे आपत्ति करोगे कि कुछ गलत बोल दिया! तुम उसे ‘बिगट’ और कम्यूनल कह दोगे!

‘सेकरेड गेम्स’ एक बोरिंग, प्रेडिक्टेबल और दोहराव वाली सीरीज़ है

समीक्षकों को अनुराग कश्यप, नवाज़ुद्दीन और राधिका आप्टे का नाम सुनकर ही चरमसुख प्राप्त होने लगता है। मतलब ये है कि ये लोग कहीं भी हों तो ऐसे चिरकुट समीक्षकों को लगता है कि एक मार्टिन स्कॉर्सेजी है, दूसरा जैक निकॉल्सन और तीसरी मेरिल स्ट्रीप। जबकि ये लोग उनकी एक बहुत बुरी फ़ोटोकॉपी भी नहीं कहे जा सकते।

ढाई लोगों का विचार है कि भारत स्त्रियों के लिए सबसे ख़तरनाक देश है

इन एक्सपर्ट्स के एक्सपर्टीज़ का दायरा कितना व्यापक है कि इन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, आर्थिक संसाधन, सांस्कृतिक या परम्परागत प्रथाओं, यौन हिंसा और छेड़-छाड़, दूसरे तरह की हिंसा और मानव तस्करी जैसे सारे विषयों पर अपनी राय रखी है।

आत्माओं के एकरूपता की अभिव्यक्ति है प्रेम

ज़रूरी नहीं कि दो ‘परफ़ेक्ट’ लोग ही प्रेम करें या फिर प्रेम में लोग परफ़ेक्ट हो जाते हैं। बिलकुल नहीं। दो बिखरे हुए लोग, दो चोर, दो असफल और गिरे हुए लोग भी प्रेम करने में सक्षम हैं।

ग़ुलामी के प्रतीकों पर गर्व करने वाली अकेली प्रजाति भारतीय ही है

कुल तीन पन्नों में आपको गुप्त वंश, मौर्य वंश, चोल, पांड्य, चेर, सातवाहन आदि को पैराग्राफ़ दे-देकर समेट दिया जाता है। बताया जाता है कि हम पर बलात्कार करने वाले और तलवार की नोक पर मुसलमान बनाने वाले आतंकी राजाओं के साम्राज्य में सूर्यास्त नहीं होता था और फलाना आदमी कितना महान था!

वामपंथी नेतृत्व चुने हुए प्रधानमंत्री को बम से उड़ाकर लोकतंत्र को बचाना चाहता है!

अगर ये लोग दलितों और आदिवासियों के हिमायती हैं तो ऐसे राज्यों और इस देश में उनकी सरकार क्यों नहीं बनती? देश में तो तीन-चौथाई आबादी दलितों और आदिवासियों की ही है, इनके सांसद विलुप्तप्राय प्रजाति क्यों हो गए हैं?

‘ठंढा आ रहा है’ वामपंथी आतंकी पिल्लो, कोंकियाओ और नए नैरेटिव गढ़ो

तुम्हारा ट्रेडिशनल आर्गुमेंट और वोटबैंक दोनों ही तुमसे भाग रहे हैं क्योंकि इस सरकार ने तुम्हारे आर्गुमेंट को भी तोड़ा है, और वोटबैंक को भी। दोनों को अपने काम से। चूँकि आँख में घोड़े का बाल और बवासीर वाले पिछवाड़े में गुस्से से तुमने कैक्टस डाल रखा है तो तुम्हें नहीं दिखेगा कि सड़के बनीं, गैस सिलिंडर मिले, फायनेंसियल इन्क्लूजन हुआ, इकॉनमी की हालत बेहतर है, टैक्स देना सहज हुआ, एक करोड़ नए कर दाता जुड़े, तुम्हारे चाचा द्वारा दिए गए लोन को लेकर भागने वालों पर कार्रवाई हो रही है…