प्राइम टाइम: नीरव मोदी कांड में फ़ेसबुकिया विश्लेषकों की गट फीलिंग का दम्भ देखने लायक है

आप ये किस बिना पर मान लेते हैं कि आप ही सही हैं, और आपके पास सिवाय चार आर्टिकल्स के कोट करने के लिए कुछ भी नहीं है। मेरे पास तो कम से कम जाँच एजेंसियों के बयान तो हैं? आपने कहाँ से जाँच करवाई? अंदेशे, संदेह, और इस बात पर कि आपको ऐसा लगता है? या इस बात पर इसमें मोदी शामिल न हो ये हो ही नहीं सकता?

‘टाइम्स अप’: दोस्ती, सेक्सटिंग, सेक्स, सेक्सुअल फ़ेवर्स और विक्टिमहुड

मैं सिर्फ उन महिलाओं के साथ हूँ जो अक्षम थीं, जिनके पास क़ानूनी सहायता का कोई विकल्प न था, जिन्हें क़ैद करके रखा गया, जिनके साथ ज़बरदस्ती हुई और पुलिस या समाज ने उन्हें चुप कर दिया।

अंकित की मौत ऑनर किलिंग नहीं, मुसलमानों द्वारा की गई नृशंस हत्या है

मैं उस मुसलमान से क्यों न डरूँ जो चंदन, नारंग, पुजारी, रवीन्द्र, अंकित की भीड़ हत्या पर चुप रहता है और अखलाख तथा जुनैद पर फेसबुक पर दिन में दस पोस्ट डालता है ये कहते हुए कि वो बहुत डरा हुआ है?

बजट 2018: मिडिल क्लास वालो, ऊपर उठो मुफ़्तख़ोरी की आदत से

जो गरीब हैं, उनको तो फिर आपके हिसाब से न तो स्कूल मिलना चाहिए, न ही मेडिकल सेवाएँ, न ही सड़कें, न ही रियायतें क्योंकि वो तो मिडिल क्लास नहीं हैं!

हर तीसरे दिन उठते जातीय बवंडरों का हासिल क्या है?

ये सारी बातें हुई नहीं, व्यवस्थित तरीक़े से हुईं। इसमें दुर्घटना को मुद्दा बनाया गया। डर का माहौल बनाया जाता रहा, ये कहकर कि डर का माहौल है। ये इतनी बार कहा गया, कि जो अपने बग़ल के गाँव में ईदगाह तक जाता था, वो अपने गाँव में मुसलमानों को दुर्गा पूजा के मेले में शक की निगाह से देखने लगा।

मॉस्को नाइट: वरजिन्स मेन्स क्लब जहाँ लोग ऑर्गेज्म ख़रीदते हैं

गणिकाओं, नगरवधुओं और वेश्याओं वाले रेड लाइट इलाक़ों से पटे पड़े देश में, इसे अनैतिक नहीं माना जाना चाहिए। मेरे लिए एक स्ट्रिपर शरीर की मदद लेती है, जैसे एक नेता अपने मुँह का, वैज्ञानिक अपने दिमाग का, या एक शिक्षक अपने विषय के ज्ञान का। जिसके पास जो है, उसका प्रयोग करते हुए, किसी की ज़रूरतों को पूरा कर रहा/रही है।

ये टूजी फ़ैसला मोदी की सरकार को तबाह कर सकता है

जो पार्टी और पत्रकार स्पेशल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में २२ साल चले मुकदमे के फ़ैसले के बाद भी एक अंतिम प्रयास के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा सुबह के चार बजे खुलवा लेते हैं, वो इस मामले में सबसे निचली अदालत के इस फ़ैसले पर कि सबूतों के अभाव में बरी किया जाता है, ख़ुशियाँ मना रहे हैं और विन्डिकेटेड फ़ील कर रहे हैं! ये एक सुखद आश्चर्य और मनोरंजक क्षण है।

अंधा कानून लुच्चा हो जाता है; सरकारों में नेता होते हैं, और नेता एक ही ब्रीड के होते हैं

सरकारों को पता है कि सरकारें परमानेंट नहीं हैं। आज हैं, कल नहीं, परसों फिर हैं। मोदी को पता है भारत कॉन्ग्रेस मुक्त नहीं होगा। घोटालों में इसी कारण से अंधा कानून लुच्चा भी नज़र आने लगता है। कोई भी देश किसी भी पार्टी से मुक्त नहीं हो पाती।

गुजरात चुनाव समीक्षा: कॉन्ग्रेस ईवीएम, ‘भाजपा को 150 नहीं मिले’ के पीछे नहीं छुप सकती

कॉन्ग्रेस नया राहुल ‘दिखा’ तो पाई, लेकिन वो ‘नया’ क्या है, ये कभी ‘बता’ नहीं पाई। पार्टी के दफ़्तर में इस पर पटाखे खूब छूटे कि वो अध्यक्ष बनने वाले हैं लेकिन इससे किसी गुजराती वोटर को क्या फ़र्क़ पड़ जाएगा ये पता नहीं चला। छवि की बाहरी रूपरेखा सबने देखी, भीतरी विजन क्या था, ये बाहर नहीं आया।