मजाक कंगना रनौत का नहीं बॉलीवुड की नपुंसक सोच का उड़ा है

आइटम सॉन्ग पर तारिकाओं की थिरकती कमर और वक्षस्थल के कसाव के बीच की जगह दिखाने की ‘कला’ को अपनी अदाकारी के दम पर चुनौती देने वाली कंगना शायद उनके लीग की नहीं है।

प्राइम टाइम 31: इरफ़ान की बीवी के हाथ बाहर होने से इस्लाम पर आया ख़तरा

मुसलमान हर उस झंडू बात पर बोलते हैं जिस पर बोलने की कोई ज़रूरत नहीं है; और वो हर उस बात पर चुप रहते हैं जिस पर गला फाड़कर चिल्लाने की ज़रूरत है कि इस्लाम के नाम पर ये बंद करो।

अमरनाथ यात्रा: ड्राइवर सलीम आदमी है, उसको मुसलमान और हीरो मत बनाओ

मैं ये इसलिए मानता हूँ क्योंकि अगर वो जिहादी होता तो बस से कूदकर भाग जाता और बस को घाटी में गिरने को छोड़ देता। उससे तो ज्यादा हिन्दू मरते, और आतंकियों की गोली भी कम ख़र्च होती। जन्नत में बहत्तर गुणा हूरें मिलती पैकेज डील में सो अलग!

प्राइम टाइम 28: कौन है जो ऐसी व्यवस्थित अव्यवस्था फैलाता है बंगाल में?

कौन है जो इनको इतनी जल्दी टोपियाँ पहनाकर, पन इंटेंडेड, डंडे, पत्थर, किरासन तेल से भींगी मशालों से लैस कर देता है? कौन है जो इतने व्यवस्थित तरीक़े से अव्यवस्था का नाटक करता है? कौन है जिसके सामने बंगाल की शेरनी की पुलिस बकरी बनकर रह जाती है?

‘500 रूपए के सामान पर 28% का टैक्स’ कहने वाले गुप्त रोग विशेषज्ञों से बचिए

इन्होंने व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के ‘मोदी-विरोध’ पाठ्यक्रम से ऑनर्स किया है, और आजकल फेसबुक पर इंटर्नशिप कर रहे हैं।

अगर गाय सिर्फ खाने की चीज़ है तो ‘हर मुसलमान आतंकवादी है’ भी सही है

ऐसे विरोधों का फ़्रंट जुनैद होता है, और पोस्टर पर मोदी, ब्राह्मणवाद, मनुस्मृति से लेकर तमाम बातें दिखती हैं।

लिंचिस्तान इज़ द न्यू इन्टॉलरेंस: सीट से मीट से बीफ़ तक, बात वही, नैरेटिव नया

ये जुनैद की माँ के आँसू, अखलाख के ख़ून, वेमुला के शब्दों की ताप पर रोटियाँ सेकते हैं।

घृणा की खेती करते फेसबुकिया बुद्धिजीवी की फ़र्ज़ी संवेदना

आप ये जताने की भरपूर कोशिश में हैं कि सरकारों ने ‘मॉब लिंचिंग’ का कोई कोर्स शुरु किया है जहाँ से प्लेसमेंट हो रहा है।

सर्वहारा क्रांति में किस सर्वहारा को सत्ता मिली?

हर विचारधारा का एक समय होता है, उसके बाद वो मर जाती है, बीमार हो जाती है, या फिर नकार दी जाती है। समय बदलता है।