कंगना रणौत: जुनूनी, हिम्मती, स्वाभिमानी लड़की जो हर लड़की को होना चाहिए

जब एक स्त्री किसी पुरुषप्रधान समाज में टूटी, जर्जर सीढ़ियों को छोड़ते हुए अपनी अलग सीढ़ी बना लेती है तो बहुत दर्द होता है। ईगो हर्ट हो जाता है पुरुष का कि इसे तो मेरे बिस्तर में होना चाहिए था, ये कहाँ लक्ष्मीबाई बनकर घूम रही है!

उनके नाम जिन्होंने नारीवाद को पीरियड्स के धब्बों के फोटो तक सीमित कर दिया है

ऐसे लोग ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर, फेसबुक आदि पर ही कैम्पेन चलाते हैं और उनके लिए वो रास्ता सबसे सही होता है जो सबसे छोटा होता है।

सिनिकल लोग संवेदनशील होने का शॉल ओढ़कर मुद्दों के मज़े लेते हैं

सरकार तो यही चाहती है कि एक नेता बेहूदा बयान दे दे, लोग उसी में उलझे रह जाएँ कि क्या बकवास बोलता है। आप लोग हमेशा इसी में उलझकर रह जाते हैं।

आत्महत्या हत्या नहीं, आत्मज्ञान का मसला है

जिंदगी को ख़त्म करना या तो एक प्रबुद्ध व्यक्ति के सवालों का अंतिम निष्कर्ष है, या फिर मानसिक रूप से रोगी व्यक्ति के द्वारा खुद पर लाई गई एक दुर्घटना।

लिप्सटिक वाले सपने: हर रोज़ी का द्वंद्व, सब के होंठ गुलाबी हैं, सब बुर्क़े में क़ैद

सबका नाम रोज़ी है। सब के होंठ गुलाबी हैं, सब बुर्क़े में क़ैद है। सबको बाहर पंख फैलाने है। सबका अपना आकाश है। सबके पंखों का रंग अलग है।

मजाक कंगना रनौत का नहीं बॉलीवुड की नपुंसक सोच का उड़ा है

आइटम सॉन्ग पर तारिकाओं की थिरकती कमर और वक्षस्थल के कसाव के बीच की जगह दिखाने की ‘कला’ को अपनी अदाकारी के दम पर चुनौती देने वाली कंगना शायद उनके लीग की नहीं है।

सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स: अपर क्लास हिन्दू मेल ब्राह्मण का फ़र्ज़ी ग्लोरिफिकेशन

मैं उनमें से नहीं हूँ जो हॉलीवुड डायरेक्टर का नाम या फ़िल्म का कंटेंट देखकर समीक्षा कर दूँ। समीक्षा तो पहले ही मेरे दिमाग़ में हो चुकी होती है, फ़िल्म तो बस टाइमपास होती है।

मैं जो हूँ जौन एलिया हूँ जनाब…

इस इवेंट से, बाकी इवेंट कराने वालों को ये सीख ले ही लेनी चाहिए कि अपने आठ दोस्तों को, किसी के फ़्लैट पर माइक थमा देने से कवि सम्मेलन नहीं हो जाता।