मजाक कंगना रनौत का नहीं बॉलीवुड की नपुंसक सोच का उड़ा है

आइटम सॉन्ग पर तारिकाओं की थिरकती कमर और वक्षस्थल के कसाव के बीच की जगह दिखाने की ‘कला’ को अपनी अदाकारी के दम पर चुनौती देने वाली कंगना शायद उनके लीग की नहीं है।

सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स: अपर क्लास हिन्दू मेल ब्राह्मण का फ़र्ज़ी ग्लोरिफिकेशन

मैं उनमें से नहीं हूँ जो हॉलीवुड डायरेक्टर का नाम या फ़िल्म का कंटेंट देखकर समीक्षा कर दूँ। समीक्षा तो पहले ही मेरे दिमाग़ में हो चुकी होती है, फ़िल्म तो बस टाइमपास होती है।

मैं जो हूँ जौन एलिया हूँ जनाब…

इस इवेंट से, बाकी इवेंट कराने वालों को ये सीख ले ही लेनी चाहिए कि अपने आठ दोस्तों को, किसी के फ़्लैट पर माइक थमा देने से कवि सम्मेलन नहीं हो जाता।

फट के फ्लावर होते ही वॉलीवुड कितना क्यूट हो जाता है!

आदमी की आस्था और उससे होने वाले रिएक्शन के लिए भी आपको तैयार रहना चाहिए क्योंकि भीड़ की अभिव्यक्ति बड़ी ही निराली होती है, इनोवेटिव भी।

गाली विमर्श: बज्जरखसौना, बजरखसुआ (बहुब्रीहि समास)

तो इस गाली का पूरा (बहुब्रीहि) समास विग्रह ये है कि वह जिसपर वज्र गिरना चाहिए। मतलब सामने वाला जब आपको इतना परेशान कर दे कि आप उसकी एक्जिसटेन्स से भी नाराज़ हो जाते हैं, तब आप इस गाली का प्रयोग करते हैं।

मुश्किल में फँसे दिल, बिज़नेस और देशभक्ति का मॉकटेल

आप अपना बिज़नेस देख रहे हैं जिसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं। सबको हक़ है। लेकिन इसके लिए देशभक्ति और मानवता का रीमिक्स राग मत अलापिए। अनुराग कश्यप को, प्रियंका चोपड़ा को, बरखा दत्त को, सगारिका घोष को… सबको हक़ है अपनी बात कहने का। लेकिन आप जिस जगह पर हैं वहाँ से मोदी को टैग करके जनता को उल्लू क्यों बना रहे हैं कि सरकार ने ऐसा किया? सरकार ने तो कभी कुछ कहा ही नहीं।

संस्कारी सेंसर की कैंची: Bar Bar Dekho ना हुआ, कटरीना का Bra Bra Dekho हो गया! 

आजकल कटरीना और सिद्धार्थ की फ़िल्म ‘बार बार देखो’ पर सेंसर बोर्ड, जिसके पूरे नाम (सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ फ़िल्म सर्टिफिकेशन) में कहीं भी सेंसर शब्द नहीं है, की संस्कारी दृष्टि पड़ी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कैटरीना के ब्रा वाले (कुछ) दृश्य हमारी संस्कृति के ख़िलाफ़ हैं इसीलिए सेंसर ने उन्हें काट दिया है। सनद […]

कन्या लौंडा विमर्श: कन्या बुलाए तो चले ही जाना चाहिए

सुबह सुबह एक विद्यार्थी का फोन आया। शिक्षक दिवस विश नहीं किया, सीधे पूछा, “सर, हम फेसबुक पर लिखे कि बुक फ़ेयर जाना है किसी को तो एक लड़की ने लिखा कि हाँ जाएँगे लेकिन कल चलो तब। लेकिन हमारा मन तो आज ही जाने का है। क्या करें।” अब बताईए कि इसमें दुविधा कहाँ […]

AIB Roast: Mainstreaming verbal pornography, just because you CAN

The supposedly ‘cool’ AIB Roast is mainstreaming filth or verbal pornography. In a nation where ‘deti hai to de warna kat le’ is sold as literature and being read by thousands, discussed in everyday discourse, no wonder it is getting likes and support by people who have bachelors degree, can read and write and have […]