‘सेकरेड गेम्स’ एक बोरिंग, प्रेडिक्टेबल और दोहराव वाली सीरीज़ है

समीक्षकों को अनुराग कश्यप, नवाज़ुद्दीन और राधिका आप्टे का नाम सुनकर ही चरमसुख प्राप्त होने लगता है। मतलब ये है कि ये लोग कहीं भी हों तो ऐसे चिरकुट समीक्षकों को लगता है कि एक मार्टिन स्कॉर्सेजी है, दूसरा जैक निकॉल्सन और तीसरी मेरिल स्ट्रीप। जबकि ये लोग उनकी एक बहुत बुरी फ़ोटोकॉपी भी नहीं कहे जा सकते।

मॉस्को नाइट: पापा’ज़ बार में ‘यू आर जॉनी डेप’ एवम् ‘मेरे पास तेल का कुआँ होती’

बार में डीके को मिली यूक्रेन की लड़की बाद में डीके की मित्र बन गई और शराब का नशा उतरने के बाद भी उसने कॉल किया, और मिलने आई। ये अपने आप में एक अच्छी बात थी। आगे क्या हुआ, वो यहाँ बताने में मुझे लज्जा आती है।

जब भंसाली जैसे सक्षम लोग क्रिएटिविटी से ज्यादा कॉन्ट्रोवर्सी पर दाव लगाते हैं

जब बात औक़ात से बाहर जाने लगी तब ट्रेलर में ‘…वो राजपूत’ और ये राजपूत वाला एंगल डाला गया। ये ट्रेलर में डैमेज कंट्रोल हेतु दिया गया है। हो सकता है पहले से ही डालना हो, पर अब तो मैं इसे ऐसे ही देखता हूँ। जब फ़िल्म पद्मावती की है तो ख़िलजी की प्रमोशन को इतना महत्व क्यों?

लुटेरों, बलात्कारियों, आतंकियों की मेनस्ट्रीमिंग कब तक होती रहेगी?

हमलोग एक निकम्मी, मूर्ख, कायर और अव्यवस्थित जनसंख्या थे, जिन्हें महान बलात्कारियों, लुटेरों, और हत्यारों तक ने जीने का तरीक़ा सिखाया। यही तो कारण है कि ग़ुलामी का हर एक प्रतीक हमारे लिए पर्यटन स्थल है।

कंगना रणौत: जुनूनी, हिम्मती, स्वाभिमानी लड़की जो हर लड़की को होना चाहिए

जब एक स्त्री किसी पुरुषप्रधान समाज में टूटी, जर्जर सीढ़ियों को छोड़ते हुए अपनी अलग सीढ़ी बना लेती है तो बहुत दर्द होता है। ईगो हर्ट हो जाता है पुरुष का कि इसे तो मेरे बिस्तर में होना चाहिए था, ये कहाँ लक्ष्मीबाई बनकर घूम रही है!

उनके नाम जिन्होंने नारीवाद को पीरियड्स के धब्बों के फोटो तक सीमित कर दिया है

ऐसे लोग ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर, फेसबुक आदि पर ही कैम्पेन चलाते हैं और उनके लिए वो रास्ता सबसे सही होता है जो सबसे छोटा होता है।

सिनिकल लोग संवेदनशील होने का शॉल ओढ़कर मुद्दों के मज़े लेते हैं

सरकार तो यही चाहती है कि एक नेता बेहूदा बयान दे दे, लोग उसी में उलझे रह जाएँ कि क्या बकवास बोलता है। आप लोग हमेशा इसी में उलझकर रह जाते हैं।

आत्महत्या हत्या नहीं, आत्मज्ञान का मसला है

जिंदगी को ख़त्म करना या तो एक प्रबुद्ध व्यक्ति के सवालों का अंतिम निष्कर्ष है, या फिर मानसिक रूप से रोगी व्यक्ति के द्वारा खुद पर लाई गई एक दुर्घटना।

लिप्सटिक वाले सपने: हर रोज़ी का द्वंद्व, सब के होंठ गुलाबी हैं, सब बुर्क़े में क़ैद

सबका नाम रोज़ी है। सब के होंठ गुलाबी हैं, सब बुर्क़े में क़ैद है। सबको बाहर पंख फैलाने है। सबका अपना आकाश है। सबके पंखों का रंग अलग है।