पुस्तक (साहित्य की विधाओं की) समीक्षा कैसे करें

समीक्षा कैसे करें जो कि किसी को पढ़ने या न पढ़ने के लिखे प्रेरित कर सके। क्या इसका कोई तरीक़ा है? कोई परिपाटी नहीं है जो कि बिन्दुवार रूप से अनुसरण किया जाना चाहिए। मतलब कोई फ़िक्स पैटर्न नहीं है, लेकिन कुछ बिन्दु हैं जिस पर आपको ध्यान देना चाहिए।

आत्महत्या हत्या नहीं, आत्मज्ञान का मसला है

जिंदगी को ख़त्म करना या तो एक प्रबुद्ध व्यक्ति के सवालों का अंतिम निष्कर्ष है, या फिर मानसिक रूप से रोगी व्यक्ति के द्वारा खुद पर लाई गई एक दुर्घटना।

श्श्शऽऽऽ… हिन्दी के नवोदित साहित्यकार सो रहे हैं!

हमारे दौर के साहित्यकार अंदर से मरे हुए हैं, नाम के भूखे हैं, और हीनभावना से ग्रस्त हैं। इनकी लेखनी को दीमक चाट गया है, और दिमाग तो गलकर कान के रास्ते रिस-रिस कर बह ही चुका है।

रक्षाबंधन का इतिहास: फ़र्ज़ी नारीवादियों के कुतर्कों के नाम

पुराणों के हर प्रसंग में स्त्रियों ने अपनी शक्ति से अपने भाई, पति या समाज की रक्षा की है। भाई की कलाई पर बँधी राखी उसकी रक्षा के लिए होती है ना कि वो बहन की रक्षा का वचन देता कहीं भी दिखता है। बहन की रक्षा भाई के लिए उतनी ही सहज प्रक्रिया है, जितनी सहज बात बहन द्वारा भाई को मुसीबत में देखकर मदद करने की।

‘सपने में भी नहीं सोचा था’ से ‘ई तो साला होना ही था’ की ओर

ये बुज़ुर्गों का गरीब जेनरेशन कब खपेगा? सब के सब यही कहते हैं कि नदी तैर कर पढ़ने जाते थे! मिट्टी के घर में रहते थे! भले ही नदी में भैंस की पीठ पर चढ़कर जाते हों और दूसरों के बग़ीचे से आम तोड़ते हों, लेकिन इनकी उम्र का बचा कौन होगा जो कन्फर्म करने जाए!

औरत के चरित्रहीन होने से पहले पुरुष अपना चरित्र खोता है

डिज़ाइनर ब्रा देखकर ही तुम्हें लगने लगता है कि ‘ये क्या! सेक्स को लेकर ये तो उतावली है, मुझे रिझाने के लिए इसने ऐसी ब्रा पहन ली है, ये तो दिनभर सेक्स के ही बारे में सोचती होगी।’ वाह रे पुरुष!

हिन्दी साहित्य के कुण्ठित सर्कल में सफल औरतें पतिता हैं, चरित्रहीन हैं

एक सफल स्त्री, वस्तुतः एक स्त्री, इस कुण्ठित समाज में अपनी योनि, स्तनों, और यौन इच्छाओं की पूर्ति की पागलपन के हद तक आकाँक्षा रखने वाली देह होने के अलावा कुछ भी नहीं। सफल स्त्री को इस तरह देखा जाता है मानो उसने हर सीढ़ी चढ़ते वक़्त एक रात, या कई रातें, किसी मर्द के साथ गुज़ारी जिसने उसे ऊपर ढकेला। वो किसी मर्द को सराहती है तो इसका अर्थ यही होता है कि वो उसके साथ सो रही होगी, तभी तो ऐसा करती है।

पत्र: कहानी क्या है, निहायत ज़रूरियात क्या हैं, आपकी पहचान क्या है

आपके मन में जो भी चल रहा हो, आपने अपने अनुभवों को जिस भी परिस्थिति में कल्पनाशीलता से रखा है, वही अभिव्यक्ति है। उसमें मसाला मत डालिए। मसाला हमेशा फ़ैक्ट्री से आता है और रेसिपी में इस्तेमाल होता है। आपके पास जो मसाला है, वो सबके पास है।