सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स: अपर क्लास हिन्दू मेल ब्राह्मण का फ़र्ज़ी ग्लोरिफिकेशन

मैं उनमें से नहीं हूँ जो हॉलीवुड डायरेक्टर का नाम या फ़िल्म का कंटेंट देखकर समीक्षा कर दूँ। समीक्षा तो पहले ही मेरे दिमाग़ में हो चुकी होती है, फ़िल्म तो बस टाइमपास होती है।

दंगल देखिए, और फ़र्ज़ी फ़ेमिनिज़्म की चरस मत बोईए

ये जीवटता और जुनून की कहानी है जो बाप के हृदय से उतर कर बेटियों की बाँहों के द्वारा जी ली जाती है। इसे देखिए क्योंकि इसे देखना चाहिए।

ये फ़िल्म धोनी का वर्ल्ड कप वाला छक्का है, कितना भी देखो, मन नहीं भरता

लाजवाब एक्टिंग, बेहतरीन निर्देशन, कसी हुई कहानी और अच्छी एडिटिंग के कारण ये फ़िल्म आप धोनी के वर्ल्ड कप फ़ाइनल के छक्के की तरह बार बार देखना चाहेंगे, देखेंगे, और चाहेंगे कि फिर से देखूँ।

पिंक कोई बेहतरीन फ़िल्म नहीं है, फिर भी देखना सबको चाहिए

कॉलेज के लड़कों को ख़ासकर देखनी चाहिए और अमिताभ के हर डायलॉग को अपने अंदर उतारना चाहिए कि लड़की तुम्हारे बाप की जायदाद नहीं है, वो हँसे, दस के साथ रहे, मिनी स्कर्ट पहने, तुमसे हँसकर बात करे, चाहे वो तुम्हारी गर्लफ़्रेंड ही क्यों ना हो, उसकी सहमति के बग़ैर उसको छूना भी ग़लत है।

Wazir movie review: वज़ीर देखिए कहानी और अदाकारी के लिए

इसकी ताक़त इसकी कहानी और तीनों मुख्य पात्र -अदिति राव, अमिताभ, फ़रहान- की अदाकारी है। अदिति ने तो अपने किरदार को बहुत अच्छी तरह से निभाया है। ये फ़िल्म आप इन तीनों के लिए, और बिजॉय नाम्बियार के लिए, देख आईए।

बाहुबली की जय!

बाहुबली देखी। आप भी देखिए। सीधी कहानी को कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है, ये इस फ़िल्म से सीखा जा सकता है। कोई महान संदेश नहीं है। कोई बनावटीपना नहीं है। खाटी दक्षिण भारतीय फ़िल्म के सारे ज़ायके आपको मिलते हैं इसमें। फ़ंतासी, डेथ-डिफाईंग हिम्मत, ग्रैविटी-शेमिंग स्टंट्स सब गुँथे हैं जो दक्षिण भारतीय सिनेमा में […]

फिल्म रिव्यू: बेबी देखिए बत्रा जैसे हॉल में

बेबी देखिए जाकर। वो वाला बेबी नहीं और ना ही जानू वाला बेबी। अक्षय वाला बेबी देखिए। कसी हुई फिल्म है, मिनट भर भी बोर नहीं होंगे। सभ्य लोगों वाले हॉल में इसका आनंद नहीं आएगा वो भी गणतंत्र दिवस के आस पास होने पर। टुटपुँजिया हॉल या सिंगल स्क्रीन में देखिए। आपके स्टेटस को […]

अमेरिकन स्नाईपर: फ़िल्म समीक्षा

अभी अभी ‘अमेरिकन स्नाईपर’ देखी। अच्छी फिल्म है। मतलब पाईरेटेड में भी प्रिंट बढिया था। देखिए कुछ चीजों में हम नैतिकता, या मोरालिटी का लोड नहीं लेते। इन दोनों शब्दों के, चाहे अंग्रेज़ी हो या हिंदी, मेरे लिए कई समयों और जगहों पर मायने नहीं होते। हीरो भी, ब्रैडली कूपर, जिसने क्रिस कायल नामक मशहूर […]

PK movie review: पी के का नंगापन हमारे कपड़े उतार देता है

बहुत रिव्यू पढ़ चुके होंगे आप लोग। पी के की बात कर रहा हूँ। पी के नंगा उतरता है धरती पर और कपड़े पहन कर लौटता है। इस नग्नता और पहनावे के बीच जो होता है वह सांकेतिक तो है ही पर एक झन्नाटेदार तमाचा भी है। लेकिन सिर्फ तमाचा ही नहीं है, इसके और […]