प्राइम टाइम: रवीश जी, वीकेंड का मुद्दा सोमवार का इंतजार नहीं करता!

लाइट लगवाना, गार्ड खड़े करने का मतलब है कि हमने मान लिया है कि बीएचयू में हरामी लौंडे तो घूमते रहेंगे, आप लाइट और गार्ड से बचाव करा लो! और लाइट में दुपट्टा खींचा गया तो? फब्तियाँ कसी गईं तो?

प्राइम टाइम (विडियो): मुद्दों को गौण करने का तंत्र

तुम्हारे इसी स्वभाव के कारण तुम्हारी ये दुर्दशा है कि तुम्हारे कॉमरेड अब कामरेड और बलात्कारी हो गए हैं, तुम्हारे ज़मीन से जुड़े नेता हवाई यात्रा में 65 लाख ख़र्च कर देते हैं, और तुम्हारे धर्मविरोधी नेता का नाम सीताराम है!

प्राइम टाइम: गौरी लंकेश की हत्या पर पत्रकारों का त्वरित फ़ैसला

आपको कितने बाकी रंजनों, कुमारों, पाठकों, यादवों की ख़बर मिली थी? कितनी बार आधे घंटे के अंदर ये तय हो गया कि किस विचारधारा के लोग थे उन्हें मारने वाले? कितनी बार पुलिस ने वैसे लोगों को पकड़ा?

प्राइम टाइम 30: अगले दंगों के ख़ून से पत्रकारों, बुद्धिजीवियों के हाथ सने होंगे

इन दोगले पत्रकारों को नकारिये जो मरने वाले का धर्म तलाश कर प्राइम टाइम में आँकड़े बताते हैं। इन बुद्धिजीवियों से बचिए जो टट्टी के रंग में जाति खोजते हैं।

प्राइम टाइम 29: जब सरकारें हमारा काटती हैं, और हम कटवाते हैं

  नमस्कार, मैं बहल जाने वाला आदमी! जी! मैं वही हूँ जो आप हैं, आपका ब्वॉयप्रेंड है, गर्लफ़्रेंड है, आपके बग़ल वाला आदमी है जो फेसबुक पर लिखे को लीगली बाइंडिंग और सार्वभौमिक सत्य मान लेता है। मैं वही हूँ जो व्हाट्सएप्प के मैसेज से विराट हिन्दू जैसा फ़ील करता है, और मैं वही हूँ […]

प्राइम टाइम 28: कौन है जो ऐसी व्यवस्थित अव्यवस्था फैलाता है बंगाल में?

कौन है जो इनको इतनी जल्दी टोपियाँ पहनाकर, पन इंटेंडेड, डंडे, पत्थर, किरासन तेल से भींगी मशालों से लैस कर देता है? कौन है जो इतने व्यवस्थित तरीक़े से अव्यवस्था का नाटक करता है? कौन है जिसके सामने बंगाल की शेरनी की पुलिस बकरी बनकर रह जाती है?

प्राइम टाइम: आखिर डर की खेती कौन कर रहा है? सरकार या पत्रकार?

आपने जो बाग़ बना दिया है ना, वहाँ लगता है कि कोई नमाज़ पढता मिलेगा तो दूसरा आदमी पीछे से छूरा मार देगा! आपके बाग़ में ख़ून की झील है, नंगी तलवारों वाले तिलकधारी हिन्दू हैं, ख़ून से लथपथ बुर्क़े में जाती मुसलमान लड़की है, हँसती हुई भीड़ है जो टोपीवालों पर तंज कस रही है… इस ख़्याल में एक ही लोचा है रवीश जी, वो ये कि ये आपके ख़्यालों में है, हक़ीक़त नहीं है।

प्राइम टाइम २७: रवीश कुमार के लेटेस्ट सारगर्भित वचन का मतलब क्या है?

“मेरी हार होगी तो यही मेरी जीत होगी। जीत जाऊंगा तो उनकी हार होगी ही होगी।”

इसका मतलब क्या है? इतनी डीप फिलॉसफी दे रहे हैं, कहीं चोर की दाढी में तिनका वाली बात तो नहीं?

प्राइम टाइम २६: वामपंथियों की चतुराई; और रवीश कुमार की ‘आध्यात्मिक चुप्पी’

वामपंथियों की चतुराई; और रवीश कुमार की उनके ‘अपर कास्ट हिन्दू मेल’ भाई द्वारा नाबालिग़ दलित के बलात्कार आरोपी होने पर ‘आध्यात्मिक चुप्पी’