प्राइम टाइम 30: अगले दंगों के ख़ून से पत्रकारों, बुद्धिजीवियों के हाथ सने होंगे

इन दोगले पत्रकारों को नकारिये जो मरने वाले का धर्म तलाश कर प्राइम टाइम में आँकड़े बताते हैं। इन बुद्धिजीवियों से बचिए जो टट्टी के रंग में जाति खोजते हैं।

प्राइम टाइम 29: जब सरकारें हमारा काटती हैं, और हम कटवाते हैं

  नमस्कार, मैं बहल जाने वाला आदमी! जी! मैं वही हूँ जो आप हैं, आपका ब्वॉयप्रेंड है, गर्लफ़्रेंड है, आपके बग़ल वाला आदमी है जो फेसबुक पर लिखे को लीगली बाइंडिंग और सार्वभौमिक सत्य मान लेता है। मैं वही हूँ जो व्हाट्सएप्प के मैसेज से विराट हिन्दू जैसा फ़ील करता है, और मैं वही हूँ […]

प्राइम टाइम 28: कौन है जो ऐसी व्यवस्थित अव्यवस्था फैलाता है बंगाल में?

कौन है जो इनको इतनी जल्दी टोपियाँ पहनाकर, पन इंटेंडेड, डंडे, पत्थर, किरासन तेल से भींगी मशालों से लैस कर देता है? कौन है जो इतने व्यवस्थित तरीक़े से अव्यवस्था का नाटक करता है? कौन है जिसके सामने बंगाल की शेरनी की पुलिस बकरी बनकर रह जाती है?

प्राइम टाइम: आखिर डर की खेती कौन कर रहा है? सरकार या पत्रकार?

आपने जो बाग़ बना दिया है ना, वहाँ लगता है कि कोई नमाज़ पढता मिलेगा तो दूसरा आदमी पीछे से छूरा मार देगा! आपके बाग़ में ख़ून की झील है, नंगी तलवारों वाले तिलकधारी हिन्दू हैं, ख़ून से लथपथ बुर्क़े में जाती मुसलमान लड़की है, हँसती हुई भीड़ है जो टोपीवालों पर तंज कस रही है… इस ख़्याल में एक ही लोचा है रवीश जी, वो ये कि ये आपके ख़्यालों में है, हक़ीक़त नहीं है।

प्राइम टाइम २७: रवीश कुमार के लेटेस्ट सारगर्भित वचन का मतलब क्या है?

“मेरी हार होगी तो यही मेरी जीत होगी। जीत जाऊंगा तो उनकी हार होगी ही होगी।”

इसका मतलब क्या है? इतनी डीप फिलॉसफी दे रहे हैं, कहीं चोर की दाढी में तिनका वाली बात तो नहीं?

प्राइम टाइम २६: वामपंथियों की चतुराई; और रवीश कुमार की ‘आध्यात्मिक चुप्पी’

वामपंथियों की चतुराई; और रवीश कुमार की उनके ‘अपर कास्ट हिन्दू मेल’ भाई द्वारा नाबालिग़ दलित के बलात्कार आरोपी होने पर ‘आध्यात्मिक चुप्पी’

प्राइम टाइम २२: सेल्फ़ी खिंचाने वाले प्रोटेस्टर का कोई माय-बाप नहीं होता

अगर आप किसी चीज़ से असहमति रखते हैं तो आप फ़ौरन विद्वान समझ लिए जाएँगे। जहाँ आपने ये कहा कि ‘मेरा इस विषय पर अलग विचार है’, आप बुद्धिजीवी होंगे उस सभा में।

प्राइम टाइम २०: चुनावी मौसम में वेमुला, नजीब, मनु स्मृति की वापसी

एक सर्वे कीजिए। सड़क पर जाईए और हिन्दुओं से पूछिए कि क्या उन्होंने मनु स्मृति का नाम भी सुना है? पूछिए कि क्या उसका एक श्लोक भी जानते हैं? पूछिए कि क्या वो अपनी ज़िन्दगी मनु स्मृति के हिसाब से चलाते हैं?

बैंग्लोर मोलेस्टेशन काण्ड, धोनी और ग़ायब होती चर्चा

विडियो देखिए। धोनी तो गए और साथ ही चर्चा में बैंगलोर काण्ड की जगह भी ग़ायब हो गई। सोशल डिस्कोर्स का शीघ्रपतन ऐसे ही होता है। अंग्रेज़ी के दर्शकों के लिए बता दूँ शीघ्रपतन इम्मेच्यॉर इजेकुलेशन को कहते हैं।

प्राइम टाइम १५: सेव एनर्जी, गो डार्क दिस क्रिसमस

और हाँ टर्कियों को मरते वक्त ईद के बकरे, यूलिन फ़ेस्टिवल के कुत्ते और नेपाल वाले भैंसा कटने वाले पर्व के विपरीत बिल्कुल भी कोई दर्द नहीं होगा क्योंकि ये फ़र्स्ट वर्ल्ड वालों का पर्व है ना।