प्राइम टाइम: मैं रवीश कुमार नहीं हूँ, मेरे लब आज़ाद हैं

आजकल आपने सुना होगा कि फासिज्म आ रहा है, आपातकाल हो गया है आदि आदि… चलिए आपको जेएनयू के एक हॉस्टल में हो रही दो संघियों की बातचीत सुनाता हूँ।

मोदी राज में माइम आर्टिस्ट को भी बोलना पड़ रहा है!

भागो साथी, फासिज्म आ रहा है…

साथी भागते-भागते मैं वो स्टेटस लिख दूँ फ़ैज़-फ़राज़ वाला? वो जिसमें हुकूमत के ख़िलाफ़ बुद्धिजीवी बात है?