ब्रह्माँड के स्पेस-टाइम में मेरे न्यू इयर का प्लान

समय भी ब्रह्माँड में एक जगह से शुरू होकर कहीं खत्म हो जाता है लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई की तरह। वर्तमान कुछ नहीं होता। तुम पार्टी कर चुके हो, तुम्हें मज़ा आ चुका है, तुम अपनी ही उल्टी के ढेर में नाक रखे सो चुके हो। २०१७, १८, १९, २० सब बीत चुका है। तुम्हारे हाथ में बस गिनना ही रह गया है।

टेलीपोर्टेशन: हम भगवानों की तरह तुरंत कैलाश से इन्द्रप्रस्थ क्यों नहीं पहुँच रहे?

अगर एक फोटोन या पार्टिकल एक जगह से दूसरी जगह ऐसे पहुँच सकता है जिसमें दूरी और समय का एंगल ग़ायब हो जाए, तो मानव शरीर जो कि ऐसे ही पार्टिकल्स का भंडार है, वो भी, थ्योरेटिकली, टेलीपोर्ट हो सकता है।

Apple goes crazy with iPhone 7 pricing

Apple is still making the best phones, no doubt. Better camera, performance and all. But what the fuck is wrong with its pricing? And when you know ‘jet black’ colour option of iPhone 7 will be the one most people will go for, you remove the lowest capacity version so that people on boundary lines […]

फ़्री-फ़्री-फ़्री के दौर में जानिए रिलायंस जियो के प्लान और शर्तों के बारे में

​कभी कभी इस पूँजीवादी समाज में ऐसे ऑफ़र आते हैं जिनको अंग्रेज़ी में ‘टू गुड टू बी ट्रू’ माना जाता है। ऐसा ही एक ऑफ़र रिलायंस ‘जियो’ 4G सिम के ज़रिए लेकर आया है जिसके कारण पूरे इंडस्ट्री में खलबली और आम जनता में उसी अनुपात में ख़ुश दिख रही हैं।  सोशल मीडिया पर बवाल […]

फ्री बेसिक: डाईंग इन कोल्ड विद थ्री अदर्स

फ्री बेसिक कहता है कि ‘हम आपको इंटरनेट से जोड़ देंगे ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य सब कुछ आपको इंटरनेट से मिल जाए’। बताईए कितना भद्दा मजाक है ये। इंटरनेट से शिक्षा मिलेगी? इंटरनेट से डॉक्टर मिल जाएगा? साला प्राईरी हेल्थ क्लिनिक हैं नहीं, स्कूलों में छत नहीं है और खाने को पेट में अन्न नहीं और बाँट रहे हैं फ्री बेसिक।

What if Internet is made free and available to every Indian?

As you all would have heard, few people control what we think through their ownership of media. The media in India, and around the world, is nothing but a kind of oligarchy which, being the veil of ‘serving’ the society, works tirelessly to work for the agenda of the ruling parties.  Internet, however, has emerged […]