ब्राह्मण, ब्राह्मणवाद और अब ब्राह्मणवादी पितृसत्ता

जिस समाज को आप नहीं समझते, वहाँ बस अपनी विचारधारा से मिलते लोगों को साथ मिल लेने से आप ज्ञानी नहीं हो जाएँगे, न ही इन्क्लूसिव और प्लूरलिस्ट। आप वहाँ अपनी अज्ञानता के कारण जैक से जैकऐस बन जाएँगे।

प्राइवेसी एक छलावा है ब्रो, नैतिकता की बात मत कीजिए

क्या इससे आपकी ज़ाती जिंदगी पर कोई फ़र्क़ पड़ा? क्या आपको टार्गेट किया गया किसी नकारात्मक उद्देश्य से? क्या आपका कुछ ऐसा चला गया जो आपने बचाने की कोशिश की थी, किसी को पता नहीं थी?

प्राइवेसी एक पब्लिक विषयवस्तु है, आप इंटरनेट पर हैं तो नंगे हैं

जब सारे नाइट टॉक शो होस्ट हर रात ट्रम्प के ख़िलाफ़ विषवमन कर रहे थे, और आज भी करते हैं, तब लोग प्रभावित नहीं हो रहे थे? क्यों? क्योंकि वो सोशल मीडिया नहीं है! जब फ़ॉक्स न्यूज़ को छोड़कर बाकी के अधिकतर न्यूज़ चैनल पैनल डिस्कशन और चर्चाओं में ट्रम्प को खुल्लमखुल्ला आड़े हाथों लेते थे तब क्या वोटर इन्फ्लूएन्स नहीं हो रहा था? मतलब मेमस्ट्रीम मीडिया स्टूडियो से कैम्पेनिंग करे तो ठीक, यहाँ आपकी पब्लिक में रखी बातें कोई ले रहा है तो आप बवाल कर रहे हैं!

फ़ेसबुक लाइव (मल्टीपल स्ट्रीम): नैरेटिव मेकर मीडिया पर नया प्रहार

सूचना पूर्णरूपेण प्रजातांत्रिक हो गई है कि ये किसी के भी हाथों में जा सकती है, और किसी के भी हाथों से आ सकती है।

ब्रह्माँड के स्पेस-टाइम में मेरे न्यू इयर का प्लान

समय भी ब्रह्माँड में एक जगह से शुरू होकर कहीं खत्म हो जाता है लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई की तरह। वर्तमान कुछ नहीं होता। तुम पार्टी कर चुके हो, तुम्हें मज़ा आ चुका है, तुम अपनी ही उल्टी के ढेर में नाक रखे सो चुके हो। २०१७, १८, १९, २० सब बीत चुका है। तुम्हारे हाथ में बस गिनना ही रह गया है।

टेलीपोर्टेशन: हम भगवानों की तरह तुरंत कैलाश से इन्द्रप्रस्थ क्यों नहीं पहुँच रहे?

अगर एक फोटोन या पार्टिकल एक जगह से दूसरी जगह ऐसे पहुँच सकता है जिसमें दूरी और समय का एंगल ग़ायब हो जाए, तो मानव शरीर जो कि ऐसे ही पार्टिकल्स का भंडार है, वो भी, थ्योरेटिकली, टेलीपोर्ट हो सकता है।