प्रिय मनोज तिवारी ‘मृदुल’, नाम के अंत में ‘कटु’ लगा लीजिए

अभी मनोज तिवारी वाला विडियो देखा। निहायत ही वाहियात क़िस्म की बात कही है। आपसे शिक्षिका ने गाने का आग्रह किया था और आप ‘आपको सांसद से बात करने की तमीज़ नहीं है, आप बच्चों से कैसे बात करती होंगी। इन पर कार्रवाई होनी चाहिए कल तक। आपको पता नहीं यहाँ क्या प्रोग्राम हो रहा है।’ आदि बोलने लगे?

आप हैं कौन? आप उस पार्टी के एक सांसद हैं जिसका सबसे शक्तिशाली व्यक्ति ख़ुद को प्रधानसेवक कहते थकता नहीं। आप सांसद भी इसी कारण बने क्योंकि लोगों ने पार्टी को वोट दिया था, उन इलाक़ों से घोड़ा-गधा कोई भी खड़ा होता तो जीत जाता।

आप भोजपुरी के गायक हैं और हीरो भी। आपकी वही पहचान भी है। सांसद तो आदमी पाँच साल के लिए होता है, फिर भुला दिया जाता है। सांसद चोर भी होते हैं, डकैत भी, बलात्कारी भी और क़ातिल भी। सांसद कोई गरिमामयी पद नहीं है, ये एक अस्थायी, और भारतीय समाज में निहायत ही घटिया निगाहों से देखा जाने वाल पद है। क्योंकि आपके ही सहकर्मियों ने, आपसे पहले के लोगों ने इस संस्था को चोरी और बेईमानी का स्तम्भ बना दिया है।

ख़ैर, वो सब बातें अलग हैं। आपको कुर्ता खोल कर नाचने का ‘आदेश’ नहीं मिला था, आपको आप जिस कला के लिए जाने जाते हैं, उसी के प्रदर्शन का ‘आग्रह’ किया गया था। इस बात को आपने अपने सम्मान से जोड़ लिया और गायकी को एक हेय दृष्टि की बात जैसा दिखाया।

गाने के लिए तो रैलियाँ भी नहीं होती मनोज तिवारी जी, लेकिन वहाँ तो आप गाए भी और नाचे भी। वहाँ गाना ठीक है, तो फिर एक आग्रह पर इतने तेवर क्यों? आपको नहीं ही गाना था तो आप एक शिक्षिका, वो भी एक महिला, वो भी आपसे आग्रह किया था, एक मुस्कुराहट के साथ, को सप्रेम वैसी ही मुस्कुराहट के साथ मना कर देते।

इसमें आपकी सांसदी कहाँ से घुस गई? सांसद हैं तो क्या आपका गला फट जाएगा गाने से? या गाने को आप बेइज़्ज़ती समझने लगे हैं सांसद बनने के बाद? आपको बहुत कम लोग, आज भी, सांसद के रूप में जानते हैं। आप भोजपुरी के एक कलाकार है, सम्माननीय गायक हैं। वही आपकी स्थाई पहचान है।

आपके नाम के अंत में मृदुल लगता है ना? उसको हटाकर ‘कटु’ लगा दीजिए।

https://twitter.com/jpsin1/status/842949771442765828….

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