मॉस्को नाइट: वरजिन्स मेन्स क्लब जहाँ लोग ऑर्गेज्म ख़रीदते हैं

पिछली रात के बार के अनुभव (यहाँ पढ़ें) के बाद तय हुआ कि स्ट्रिप क्लब जाकर गधा जनम छुड़ा लिया जाय। इससे पहले कि आप आगे पढ़ें, ये माप लें कि कहीं आप जजमेंटल व्यक्ति तो नहीं जो ये सोचता है कि ‘अरे, बार में गया और पिया नहीं होगा!’, या ये कि ‘हमको मत बताओ कि स्ट्रिप क्लब जाकर वो कोक पीकर आ गया होगा’। अगर आप वैसे हैं तो आप ये मान लाजिए कि मैंने चार लड़कियो के साथ प्राइवेट डान्स लिया और फ़ाइव-सम भी किया। फिर कोई और पोस्ट पढ़ लाजिए जो आपके काम की हो।

स्ट्रिप क्लब के लिए ऊबर ज़रा जल्दी ही मिल गया। यहाँ घर से ऊबर बुक करने का मतलब है कि लोकेशन समझाने में बहुत समय बर्बाद होगा। इसलिए सड़क पर खड़े होकर बुक कीजिए और कैबवाले को बोल दीजिए तीन बार ‘लोकेशन… कम ऑन लोकेशन’। इतने में वो सीधा रोड पर आएगा और बात करने की भी ज़रूरत नहीं होगी।

ख़ैर, हमलोग अपने ‘लोकेशन’ पर पहुँच गए। बाहर में बस एक सीधा-सा बोर्ड जो आप तस्वीर में देख पा रहे होंगे, और उसके नीचे दरवाज़ा जहाँ से संगीत की आवाज़ सुनाई दे रही थी। हमलोग इधर-उधर देखते हुए गेट खोलकर घुस गए क्योंकि अंततः हैं तो वहीं से जहाँ सिनेमा देखने घुसते वक्त गाँव का कोई दिखा तो बाप को बता देगा। भले ही मॉस्को में हैं, लेकिन पीठ पर से भारत, बिहार और गाँव के लोग नहीं उतरते।

सीढ़ी बेसमेंट में बने अंडरग्राउंड क्लब में जाती थी जिसके पहले शीशे का एक दरवाज़ा था। दरवाज़े के ऊपर एक एचडी टीवी थी जिसपर नारियाँ उत्तेजक, लेकिन नग्न नहीं, अदाओं में कुछ कहना चाह रही थी। बाहर ठंढ इतनी थी कि उसकी अदाओं का मुझपर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। दरवाज़ा ढकेलते ही रंग और संगीत के साथ-साथ कामोत्तेजक कपड़ों में खड़ी तीन मोहतरमाएँ खड़ी थीं। एक मोटा-ताज़ा पुरुष भी था जिसने हमसे कहा कि हम ऊपर के कपड़े, यानि जैकेट-ओवरकोट वग़ैरह उतार दें।

“उसकी उम्मीद-ए-नाज़ का हमने से ये मान था कि आप जैकेट उतार दीजिए, जैकेट उतार दी गई”

अब मुख्य मसले पर बातचीत चालू हुई। एक मोहतरमा ने पहले ही कहा कि सेक्स या उससे जुड़ी कोई भी बात अंदर नहीं होगी। जिसका मतलब था कि आप किसी भी लड़की को न तो चूम सकते हैं, न ही किसी भी तरह की शारीरिक ज़बरदस्ती कर सकते हैं। मुझे लगा कि इतना तो बहुत ही फ़ेयर डिमांड है जो हर लड़के को मानना चाहिए। हमने हामी भरी और फिर उसी मोहतरमा ने हमें रूल्स ऑफ़ द गेम समझाए क्योंकि यहाँ ‘माह लाइफ़ माह रूल्ज़’ नहीं चलता।

हमसे एंट्री फ़ी ली गई और तीन चिप दे दिए गए। उस चिप को लेकर हमलोग मोहतरमा के पीछे-पीछे नीचे चले आए। उसने बताया कि वॉशरूम एक तरफ है, और स्मोकिंग के लिए कहाँ जाना है।

एक चौकोर जगह थी, जिसके अंदर पोल डान्स और बाकी तरह के स्टेज परफ़ॉर्मेन्स के लिए एक स्टेज बना हुआ था। मतलब एक आयत के अंदर एक और आयत जिसकी एक तरफ स्टेज और सामने कुछ टेबल और सोफ़े लगे थे। इस छोटे आयताकार जगह के चार कोने पर एलईडी पैनल्स लगे हुए, करीब 12-15 फ़ीट ऊँचे स्तम्भ थे। स्टेज के ऊपर तमाम लाइट्स लगे थे जो संगीत पर रंग और प्रभाव बदलते रहते थे।

फिर उसके दो तरफ कुछ सोफ़े और लगे थे। स्टेज के बिलकुल सामने एक बार था जहाँ से आप कुछ ऑर्डर कर सकते थे। बार के भी दो हिस्से थे। एक हिस्सा वो था जहाँ आप एक ख़ास फ़ीस देकर पूरी रात जितना चाहो, जो चाहो पी सकते थे। दूसरा हिस्सा वो था जहाँ हमारे जैसे लोग बैठते थे जो उतना ही पीना चाहते थे जितना इच्छा हो। ये हिस्सा छोटा था और वैसे कोण पर था जहाँ से आपको स्ट्रिप डान्स बिलकुल न दिखे।

हमलोग उसी हिस्से में बैठे क्योंकि पीकर भंड होने का इरादा था नहीं, और मैं वैसे भी पीता नहीं तो पैसे देना बेवक़ूफ़ी थी। मैंने एक कॉफ़ी माँगी, बाक़ियों ने बीयर ली और माहौल में घुलने की तैयारी करने लगे। बारटेंडर चार थे, उसमें से एक लड़की थी जो मुझे काफ़ी ख़ूबसूरत लगी। एक बार तो मैंने क़लम माँगकर नैपकिन पर ये लिखकर देने की भी सोची, फिर आधा घंटा कुछ लिखा ही नहीं तो वो क़लम वापस माँगकर ले गई।

अब मैं आपको वहाँ के माहौल की बात बताता हूँ। एक कसे हुए बदन का लड़का, खूब टैटू करवाए, कॉडलैस माइक पर स्ट्रिप परफ़ॉर्मेंस और पोल डान्स की कमेंट्री कर रहा था। मुझे रसियन तो नहीं आती लेकिन मुझे यक़ीन है कि वो उत्तेजक शब्दों का इस्तेमाल ही कर रहा होगा।

सोफ़ों पर युवा से लेकर पचास साल तक के मर्द थे और पूरे क्लब में बारटेंडर, रिसेप्शनिस्ट और बाकी की तीन लड़कियों को छोड़कर सारी लड़कियाँ सिर्फ अंतःवस्त्रों में ही थी। नग्न छातियाँ और हाय हील्स में सारी लड़कियाँ कहीं से आ रही थीं और कहीं जा रही थीं। कुछ लड़कियाँ स्टेज पर रोल-प्ले वाले नाटक का मंचन कर रही थीं, कुछ बीच में गाउन पहन कर आती थीं और बार पर बैठे लड़कों को ‘प्राइवेट डान्स’ के लिए आमंत्रित करती थी।

हम तीनों में से कोई भी अभी तक कन्याओं में रूचि नहीं दिखा रहा था। तब एक मोहतरमा आईं और हमें याद दिलाने लगीं कि क्या-क्या किया जा सकता है। जैसे कि जो चिप हमारे हाथ में शुरुआत में मिले थे, उससे आप एक प्राइवेट डान्स ले सकते थे। उसके लिए कमरे बने थे। मेरी कॉफ़ी खत्म हो चुकी थी, तो मैंने कोक मँगा ली और पूरे समय बारटेंडर को चोरी-छिपे देखता रहा। वो समझ गई कि मुझे अर्धनग्न लड़कियों में या तो रुचि नहीं है, या मैं फ़र्ज़ी का इम्प्रेस करने की कोशिश में हूँ।

यहाँ नियम ये था कि आप उस चिप को किसी भी कन्या को दे सकते थे। कन्या की कलाई पर लाल, नीला या
हरा प्लास्टिक बैंड लगा हुआ था जिसका कुछ न्यूनतम मूल्य था। ये ग़ौर करने की बात थी कि ये मूल्य स्तनों के आकार के बढ़ने पर बढ़ रहे थे। दूसरी बात ये कि इस क्लब में अस्सी प्रतिशत लड़कियों के स्तन या तो छोटे थे, या बहुत छोटे। निजी तौर पर मुझे बड़े या सामान्य आकार के स्तनों वाली लड़कियाँ पसंद हैं। अब इस बात को पकड़ कर ज्ञान न दें क्योंकि ये मेरी पसंद है, यूनिवर्सल ट्रूथ नहीं।

मुख्य मुद्दे पर वापस आते हुए ये कहना चाहूँगा कि संगीत रूसी और अंग्रेज़ी में था। सारे लोग थिरक रहे थे। कोई एक सोफ़े पर तीन लड़कियों के साथ था, तो कोई चार। मैं पिछली रात वाले पापा’ज़ बार की ही तरह यहाँ भी कौतूहल का विषय बना हुआ था। ज़्यादा कौतूहल इस बात का भी कि पहली नज़र में सारी नग्न लड़कियों को देखने के बाद मैंने पूरे चार घंटे किसी को पलटकर देखा ही नहीं। पूरे समय मैं कोक लेकर पीता रहा और दोस्तों से बात करता रहा।

इसमें आदर्श की कोई बात नहीं थी। बात सीधी-सी ये है कि मैं अनजान लोगों से किसी भी तरह के शारीरिक संपर्क बनाने की सोच से ही असहज हो जाता हूँ। मैं पॉर्न देख लूँगा लेकिन मुफ़्त में भी टिंडर या पैसे देकर सेक्स करने का विकल्प हो तो मुझसे नहीं हो पाता। भले ही मैं पाँच सालों से सिंगल रहा होऊँ, पर मेरे लिए ये असंभव है। मैं पहले बात करूँगा, फिर ही आगे कुछ हो पाएगा। दूसरी बात ये है कि मैं कोई आदर्शवाद का चोला नहीं पहन रहा। यहाँ मैं कुछ भी साबित नहीं कर रहा, बस ये बता रहा हूँ कि मेरे निजी अनुभव क्या रहे हैं।

प्रोग्राम चल रहा था। मैं कोक पी रहा था कि गर्दन के दोनों ओर किसी के मसाज करने जैसी उँगलियों का अहसास हुआ और मैं चौंक गया। मुझे लगा डीके कर रहा होगा, लेकिन वो डीके नहीं, कोई और थी। फिर उसके हाथ मेरे कंधों से उतरते हुए, पेट से नीचे कमर तक चले गए और वहाँ तक चले गए जहाँ वो ले जाना चाहती थी ताकि मैं पैसे उसे दे दूँ। एक तो मैं निर्मोही आदमी, दूसरा ठंढ ऐसी भयंकर कि मर्दों के अंग-विशेष वैसे ही गायब-से रहते हैं, मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। मैंने उसका हाथ बहुत ही विनम्र तरीक़े से अपने शरीर से अलग कर दिया। वो हट तो गई लेकिन जाते वक्त मेरी गर्दन तोड़ देने का इशारा मेरे दोस्तों को करती हुई गई। मैंने मुस्कुरा दिया और कोक पीने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद दो लड़कियाँ आईं, जो मुझे बहुत देर से घूर रही थीं। या, मुझे ऐसा लगा क्योंकि वो मेरे पास तीन बार आई थीं। एक ने लाल रंग का लम्बा गाउन जैसा कुछ पहन रखा था, और एक ने नीले रंग का ड्रेस जो घुटनों के काफी ऊपर खत्म हो रहा था। लाल वाली ने मेरे पास कानों में आकर कहा, “यू आर जॉनी डेप्प!” मैंने मना कर दिया कि ऐसा नहीं है। वो खिलखिलाती रही, “हे जॉनी, वान्ट अ प्राइवेट डान्स?” मैंने मुस्कुराकर उसकी नग्न पीठ पर हाथ रखकर थपथपाया और हटने का इशारा किया। वो थोड़ी देर मेरे कंधों से लिपटती रही, सहलाती रही और मैं था कि ज़ाकिर खान के ‘सख़्त लौंडे’ की तरह पिघल ही नहीं रहा था।

दोनों दुखी होकर चली गईं। अब मैंने बार की बोतलों को ही देखने की कसम खा ली थी और सारी लड़कियों को सिवाय मेरी पीठ के कुछ नहीं दिख रहा था।

थोड़ी देर बाद फिर वही दोनों मेरे पास आईं, जब बाकी दोनों दोस्त सिगरेट पीने चले गए, और फिर से मेरे गानों में गुनगुनाने लगीं! मैंने काफी संजीदगी से उनकी तरफ देखा और कहा, “ओके! लेट्स गो। बट हेयर इज़ द थिंग, यू विल हैव टू पे मी बिकॉज़ जॉनी विल गिव यू द अपॉरचुनिटी टू डान्स फ़ॉर हिम।” मतलब ये कि ‘मैं प्राइवेट डान्स के लिए तैयार हूँ, लेकिन पैसे मैं लूँगा क्योंकि मैं तो जॉनी हूँ न!’ वो दोनों ‘नॉटी ब्वॉय’ बोलकर चली गईं।

इसके बाद भी लड़कियाँ आती रहीं, और मुझे लुभाती रहीं। किसी में कोई ख़राबी नहीं थी, बस मेरा मिज़ाज वैसा नहीं कि मैं इस काम के लिए किसी तो पैसे दूँ। वो भी किसी अजनबी को जिसे मैं जानता तक नहीं। कुछ समय बाद सबको ये लग गया कि ‘सख़्त लौंडा’ नहीं पिघलेगा। मुझे तो ये लगा कि कोक पीते लौंडों के पास आती ही क्यों है भला! ऐसे लोगों से क्या आशा की जा सकती है ऐसी जगहों पर जो कि संगीत और माहौल को देखने आते हो! जैसा कि मेरे एक दोस्त ने मेरे स्ट्रिप क्लब में होने की ख़बर सुनकर ये कहा, “तुम्हारा बार या क्लब में होना वैसा ही जैसा किसी मुल्ले का मंदिर या पुजारी का मस्जिद में होना। दोनों वहाँ के आर्किटेक्चर को निहार रहे होंगे।”

यूँ तो इसे व्यभिचार का अड्डा माना जाएगा, और माना जाता रहा है, लेकिन मेरे लिए अगर ये क़ानूनी है, और दायरे में रहकर होता है तो ग़लत नहीं लगता। गणिकाओं, नगरवधुओं और वेश्याओं वाले रेड लाइट इलाक़ों से पटे पड़े देश में, इसे अनैतिक नहीं माना जाना चाहिए। मेरे लिए एक स्ट्रिपर शरीर की मदद लेती है, जैसे एक नेता अपने मुँह का, वैज्ञानिक अपने दिमाग का, या एक शिक्षक अपने विषय के ज्ञान का। जिसके पास जो है, उसका प्रयोग करते हुए, किसी की ज़रूरतों को पूरा कर रहा/रही है।

सेक्स एक ज़रूरत है। कुंठित व्यक्ति को पैसे देकर भी अपनी भूख मिटा लेना चाहिए। इससे फायदा ये होगा कि वो सड़कों पर, सोशल मीडिया पर, बंद कमरों में या और किसी भी जगह पर बिना इजाज़त के किसी के साथ बदतमीज़ी या बेरहमी से पेश नहीं आएगा। अगर ये काम कहीं ग़ैरक़ानूनी है तो वहाँ नहीं होना चाहिए। अगर कहीं ह्यूमन ट्रैफिकिंग वाली लड़कियों का इस्तेमाल हो रहा हो, परमिट/लाइसेंस नहीं है, तो वो नहीं होना चाहिए।

मेरे लिए ये अनुभव नया और अनोखा था। मैं वहाँ चार घंटे बैठा रहा और एक सेकेंड के लिए भी मेरे शरीर में कोई सिहरन या अनियंत्रित भाव नहीं आए। न ही मुझे ऐसा लगा कि यहाँ कौन देख रहा है, प्राइवेट डान्स ले ही लूँ। मेरी इच्छा न तो दिल्ली में थी, न मॉस्को में हुई, न ही मैं नैतिकता की चादर ओढ़ रहा हूँ कि जो ऐसा करते हैं वो गलत हैं, और मैं नहीं करता तो महान हूँ। जिन्हें लगता है कि मैं नामर्द हूँ , वो अपनी जगह सही हैं, और खुश रह सकते हैं। वहाँ जाने से मेरे शरीर या दिमाग को किसी भी तरह का ख़तरा नहीं हुआ। ये उनके लिए लिखा जो ये कुतर्क देंगे कि अनुभव के लिए ज़हर भी खाना ज़रूरी है क्या।

ख़ैर, समय काफी हो चुका था तो मैंने सुझाव दिया कि घर निकला जाए। ऊबर बुला लिया गया और थोड़े इंतज़ार के बाद हमलोग अपने घर की तरफ चल पड़े। बाकी दोनों ने क्या किया ये मेरे अनुभव और अधिकारक्षेत्र से बाहर की बात है।….

Leave a Reply

Your e-mail address will not be published. Required fields are marked *