भाजपा, काँग्रेस आदि पार्टियाँ सारे दानदाताओं के नाम क्यों नहीं बताती?

सुप्रीम कोर्ट को, भ्रष्टाचार विरोधी पार्टियों को (जो कि हर पार्टी कहती है कि वो है) दुनिया भर की बातें करने और आदेश जारी करने का शौक़ है लेकिन राजनैतिक पार्टियों को मिलने वाले दान-दक्षिणा पर कुछ नहीं बोलते कि 20000 से कम वाले दान को क्यों नहीं दिखाते?

मैं चाहूँ तो बीस करोड़ रूपए हर दिन बीस-बीस हजार करके दे सकता हूँ और उसका कोई हिसाब नहीं होगा। एक आँकड़े के हिसाब से 2013 से 2015 के बीच भाजपा के नाम 977 करोड़ का ऐसा दान है जो कि बिना नाम-पते का है। काँग्रेस के नाम यही आँकड़ा 969 करोड़ का है।

आम आदमी पार्टी ने अपनी साइट पर दाताओं के नाम-पते और राशि का ब्योरा डालना कब का बंद कर दिया है।

हलाँकि जिस संस्था ने ये बात बताई है उसने सिर्फ दो सालों का ब्योरा दिया है ताकि इसमें से बाकी मीडिया ये हेडलाइन बना सके कि ‘भाजपा के पास है सबसे ज्यादा बिना बताया गया दान’। काँग्रेस अपने बुरे दौर में भी मात्र आठ करोड़ पीछे है।

बाकी पार्टियों का नहीं पता इसलिए नहीं कह सकता। जरूरत है कि दान में मिले एक-एक पैसे का हिसाब ‘प्रधानमंत्री दान दाता ब्योरा योजना’ के तहत हर पार्टी की साइट पर रीयल टाइम में अपडेट हो। अगर आम जनता को नहीं बताना चाहते तो कोई बात नहीं, लेकिन टैक्स डिपार्टमेंट और कोर्ट को इसकी सारी जानकारी होनी चाहिए।

हम सब जानते हैं कि चुनावों में किस तरह से काला धन धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है। हमारे गाँवों में मुखिया चुनाव में हर वोट पर सौ रूपए दिए जाते हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी ये होता है। रैलियों के लिए लोगों को जुटाना, चुनाव प्रबंधन आदि में जो पैसा ख़र्च होता है वो कभी भी सामने नहीं आता।

कोई भी पार्टी ये क्लेम नहीं कर सकती कि इस बात पर वो पारदर्शी है। हाँ, भाजपा का टॉप पर होना लाज़मी है क्योंकि अभी वो सत्ता में है। सत्ता को सब दान देते हैं। और भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जिससे लोगों को आशा भी है कि इस मुद्दे पर पारदर्शिता की बात करे क्योंकि आजकल भ्रष्टाचार मिटाने का गर्भ धारण करने वाले गर्भपात कराते नज़र आ रहे हैं।….

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