प्राइम टाइम: बिहार में बहार है, जान लो कि ई नीतिसे कुमार है!

 

प्राइम टाइम: बिहार में बहार है, जान लो कि ई नीतिसे कुमार है!

नमस्कार,
मैं ‘इस चैनल पर सबसे पहले’ न्यूज़ ब्रेक करने वाला पत्रकार

नीतीश कुमार ने इस्तीफ़ा दे दिया। इस्तीफ़े कई प्रकार के होते हैं। आपने भी अपनी नौकरी में दिया होगा। कई बार इस्तीफ़े ले लिए जाते हैं। लेकिन नीतीश कुमार का इस्तीफ़ा थोड़ा अलग, और अपने आप में पायोनियरिंग एफर्ट टाइप वाला है। हिन्दी में बोलता हूँ, लेकिन अंग्रेज़ी जानता हूँ।

ख़ैर, नीतीश का इस्तीफ़ा, इस्तीफ़ा नहीं, उसी नौकरी में बने रहने की नायाब अर्ज़ी है। ये वो इस्तीफ़ा है जो इनकी छवि के साथ-साथ इनके भावी मुख्यमंत्रित्व में भी बिरला सीमेंट वाली जान डाल देगा। एक बार इन्होंने जीतन माँझी के साथ भी ऐसा एक्सपेरिमेंट किया था। वो भी सफल रहा था। इनको इसका एक्सपीरिएंस है।

बिहार की राजनीति को समझना बहुत मुश्किल नहीं है अब। फेसबुक पर राजनीति विशेषज्ञों ने ना सिर्फ सरकार गिरा और बना दी है, बल्कि किस को क्या मंत्रालय मिलेगा इसकी लिस्ट भी इस प्राइम टाइम के अपलोड होने तक आ जाएगी। आप लोग चिल मारिये क्योंकि आम जनता के हिस्से में वही है।

आपको लग रहा होगा कि मोदी को पानी पी-पी कर कोसने वाले नीतीश अब क्या करेंगे! कुछ नहीं करेंगे, काहे कि चप्पा-चप्पा भाजप्पा होने वाला है और जिनपिंग झा से लेकर माओ मिश्रा तक ने कहा है कि बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का। नीतीश जी के इस्तीफ़ा देते ही मोदी, बड़े वाले जिनके भक्त बहुत ज्यादा हैं, और राम के कम, ने हिन्दी में ट्वीट मार दिया और स्वागत कर दिया कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लिए क़दम का सवा सौ करोड़ देशवासियों ने स्वागत किया है। ये उनको कैसे पता चला, ये मुझे पता नहीं।

लोग कह रहे हैं कि सब मोदी की चाल है! नहीं तो क्या योगी की चाल होगी? इन्टोलरेंस और अवार्ड वापसी किसकी चाल थी? और मोदी काहे नहीं चलेगा चाल? खैर, ये ट्वीट वाला मसला जो है वो कुछ ऐसे हुआ होगा कि अमित शाह ने नीतीश को कॉन्फ़्रेंस पर लिया होगा मोदी जी के साथ, जिसकी सूचना कल के कोविंद शपथग्रहण के वक़्त फ़्रंट रो में बैठे नीतीश को अमित भाई शाह ने चिट के माध्यम से दी होगी। उसमें तय ये हुआ होगा कि नीतीश इस्तीफ़ा देंगे, और मोदी जी ‘ट्वीट’ वाले ब्लू बटन पर अँगूठा धरे रहेंगे। वही हुआ भी। इधर इस्तीफ़ा उधर स्वागत।

ख़ैर, मेरी राजनीतिक समझ तो बहुत ज्यादा है नहीं बावजूद इसके कि मैं बिहार का हूँ। लोगों को लगता है कि बिहार वालों को राजनीति की समझ भयंकर होती है, मेरी है कि नहीं मुझे नहीं पता। फ़िलहाल सूत्रों के हवाले से ये ख़बर मिल रही है कि किसी ह्यूंडई के शो रूम में सुशील मोदी और नीतीश कुमार रोज़ दारू-चखना खाते थे, शटर गिराकर, लाइट बुझाकर मोबाइल पर खेंसारी लाल यादव के गीत सुनते हुए। वहीं ये डिसीजन हुआ कि अब बहुत हुआ, तेजस्वी इस्तीफ़ा नहीं देंगे तो हम ही दे देंगे।

अब दो सूरतें हैं। एक ये कि विधानसभा भंग हो, जो कि होगी नहीं काहे कि नीतीश जी पहले जॉब पकड़ के बॉस को माँ-बहन की गाली देकर छोड़ने वाले एम्प्लॉयी लगते हैं। हमारी तरह नहीं कि गरिया कर छोड़ दिया और सीवी लेकर घूम रहे हैं। फोटोशॉप से सैलरी स्लिप और एक्सपीरिएंस सर्टिफ़िकेट बनाते हैं, और टहल रहे हैं सीना ताने, गर्दन उठाए।

तो, नीतीश बाबू के पास दूसरा विकल्प है भाजपा से समर्थन। उससे दो बातें होंगी, पहली तो उनकी कुर्सी और चमकदार हो जाएगी कि भ्रष्ट लालू का साथ छोड़ दिया, और दूसरी ये कि चप्पा-चप्पा भाजप्पा में एक और चप्पा जुड़ जाएगा।

बाकी बातें ज्ञानी लोग आपको बताते रहेंगे। फ़िलहाल ये समझ लीजिए कि दूध का धुला कोई नहीं है, और स्टंट मारना सबको आता है। सहाबुद्दीन ने सही कहा था नीतीश कुमार परिस्थितियों के मुख्यमंत्री हैं। अब लालू परिस्थितियों के क्या हैं, ये पूछने मैंने अपने सूत्रों को भेज दिया है।

फिलहाल नीतीश कुमार सेकुलर से कम्यूनल होने वाले हैं। आपलोग उसकी तैयारी करें। अचानक से उनके कार्यकाल में हुई राजनैतिक से लेकर सामाजिक और पत्रकार-पेशा-विशेष से संबंधित हत्याओं का ठीकड़ा पता नहीं किसके सर जाएगा। अचानक से उनका कुर्ता सफ़ेद होकर चमकने लगेगा।

और ध्यान रहे कि बाग़ों में बहार है या नहीं पता नहीं, बिहार में तो बहार है, पर जान लो कि ई नीतिसे कुमार है।

नमस्कार।….

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