प्राइवेसी एक छलावा है ब्रो, नैतिकता की बात मत कीजिए

प्राइवेसी एक छलावा है। मैंने इस पर बहुत लम्बा लिखा है कुछ दिन पहले। बहुत लोग सामने वाले को गरियाकर अपनी बात कह रहे हैं। ऐसे किसी को गाली देकर नहीं लिखना चाहिए। लॉजिकल बात लिखना अपने आप में कुतर्की को गरियाने जैसा ही होता है।

दूसरी बात ये कहना चाहूँगा कि हमारा, आपका डेटा तो ऐसे ही पसरा हुआ है। प्रोफाइल में ऐसा क्या है जो हमने फेसबुक को नहीं दिया है? आँखों के रंग तक बता देते हैं। आईफोन को छोड़कर और कोई फोन ये क्लेम नहीं करता कि आपके फ़िंगर प्रिंट का डेटा कहाँ जाते हैं।

लेकिन बात ये है कि क्या वो आपका बुरा करने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं? ये बात सिर्फ नैतिकता पर टिकी है कि हमसे नहीं पूछा। आपका डेटा सरकार भी इकट्ठा करती है NSSO के ज़रिए, जनसंख्या के ज़रिए। उसमें जाति, धर्म, हैसियत सब बताए जाते हैं। वो पब्लिक डोमेन में होता है जिसका इस्तेमाल चुनावों में योजना बनाने के लिए होता रहता है।

अब हम इवॉल्व हो गए हैं। हम अपने डेटा को डिजिटली पब्लिक में शेयर कर रहे हैं कि हम अभी क्या कर रहे हैं, कहाँ जा रहे हैं, क्यों जा रहे हैं। अब सोचिए कि इसका उपयोग कोई डाका डालने के लिए कर ले तो कौन ज़िम्मेदार है?

नमो एप्प ने आपका डेटा लिया, कॉन्ग्रेस एप्प ने आपका डेटा लिया। लेकिन क्या इससे आपकी ज़ाती जिंदगी पर कोई फ़र्क़ पड़ा? क्या आपको टार्गेट किया गया किसी नकारात्मक उद्देश्य से? क्या आपका कुछ ऐसा चला गया जो आपने बचाने की कोशिश की थी, किसी को पता नहीं थी?

अगर स्टेट इस डेटा को लेकर सर्विलान्स करने लगे तब समस्या है कि आपको ब्लैकमेल किया जा सकता है कि आप तो ये कर रहे थे। वैसे ही, डेटा हैकर आपकी निजी जानकारी नहीं चुराते क्योंकि उससे उनको फायदा नहीं। वो बैंक से आपके क्रेडिट कार्ड की जानकारी चुरा लेते हैं। वो आपके फोन से नग्न तस्वीरें चुरा लेते हैं कि वो आपको ब्लैकमेल कर सकें।

लेकिन आम कम्पनियाँ अगर ये डेटा इकट्ठा भी कर लें तो भी वो इसे ब्लैकमेल करने के लिए उपयोग नहीं कर सकते। करेंगे तो उनकी साख जाएगी, केस चलेगा और बिज़नेस ख़त्म हो जाएगा। फ़ेसबुक के शेयर्स की वैल्यू कितनी गिर गई पता कर लीजिए।

ये एक अजीब विरोधाभास है जब आप ये कहते पाए जाते हैं कि डेटा सुरक्षित नहीं है, सरकार एकत्र कर रही हैं ब्ला ब्ला ब्ला। मीडिया वाले तो स्टूडियो से डेमोग्राफिक डेटा एनालाइज़ करके आपको उस तरह की ख़बरें और चर्चाएँ परोसते हैं। वो भी तो आपको, आपकी इजाज़त के बिना, प्रभावित कर रहे हैं।

फिर आपका डेटा उपलब्ध है, आपको फ़्री की सर्विस भी लेनी है, तो कम से कम आप प्राइवेसी का रोना तो मत रोइए कि हमारे डेटा का उपयोग चुनावों में प्रोफाइल तैयार करके हमें प्रभावित करने के लिए किया जाता है। ये सब कोरी गप्पबाज़ी है।

सरकार बताती रहती है कि इन बयालीस एप्प का प्रयोग न करें लेकिन क्या आप ये कह सकते हैं कि आपके फोन में यूसी, वीचैट, सी क्लीनर जैसे एप्स नहीं हैं? हर स्मार्ट फोन एक तरह से कॉम्प्रोमाइज़्ड है। एँड्रायड तो बहुत ज़्यादा ही। इसलिए ये शोर बेकार का है। हाँ, आपको कोई ब्लैकमेल कर रहा हो तो शिकायत ज़रूर करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *