रवीश ने धर लिया: मोदी ने बस 99.9995% गाँवों में ही बिजली पहुँचाई!

मूर्ख लोग अपनी अनभिज्ञता के कारण किसी भी मुद्दे पर बहुत कुछ नहीं बताते। लेकिन जो धूर्त होता है, वो कई बातें सिर्फ़ अपनी बात को साबित करने के लिए छुपा जाता है। ऐसे ही एक धूर्त हैं रवीश कुमार।

मोदी ने दावा किया कि भारत के हर गाँव में बिजली पहुँच गई है। रवीश कुमार तीन गाँव खोज लाए जिसमें नहीं पहुँची थी। एक गाँव ऐसा था जहाँ सारे सामान पड़े थे लेकिन ब्यूरोक्रेटिक कारणों से दो एजेंसियाँ गाँव में बिजली का कनेक्शन नहीं लगा पा रहे थे।

रवीश कुमार ने तीन गाँव दिखा दिया, और रवीशभक्त खुश हैं, “देखा… देखा… मोदी झूठ बोल रहा था! मोदी झूठ बोल रहा था!” फिर तालियाँ पीट रहे हैं और शेयर कर रहे हैं।

रवीश का कार्यक्रम मैंने भी देखा। उसमें दो आईएस अफ़सर की पीली किताब लेकर वो कई बातें बता रहे थे कि कैसे यूपीए ने साढ़े पाँच लाख गाँवों में बिजली पहुँचाई और कैसे मोदी बस 18,000 में बिजली पहुँचाकर पूरा क्रेडिट ले रहा है। फिर उन्होने रिपोर्टरों को भेजकर रिपोर्टिंग करा दी जिसकी शुरुआत बिलकुल तय तरीके से मिट्टी के तेल के दिये से हुई और अंत इस बात पर हुई कि लोग वहाँ बेटियाँ नहीं ब्याह रहे। बहुत हृदयविदारक था। रवीश जी! छा गए!

उन्होंने ये भी बताया कि झारखंड और मध्य प्रदेश की सरकारों ने पूर्ण विद्युतीकरण का लक्ष्य इस साल के अंत तक रखा है। रवीश जी के चैनल को और गाँव नहीं मिले होंगे इसलिए जितना ढूँढ सके, दिखा दिया। जो इनकी धूर्तता जानते हैं, वो अच्छे से जानते हैं कि और गाँव होते तो रिपोर्टर ज़रूर घूम आते।

अब आते हैं उन बातों पर जो सर बताना भूल गए, यानि कि धूर्ततावश छुपा दिया। यूपीए की सरकार तक ‘गाँव में बिजली पहुँच गई’ का मतलब गाँव के 10% घरों की रेन्ज में खंभों को पहुँचाना था। यानि कि गाँवों की संख्या तो वाक़ई यूपीए की साढ़े पाँच लाख की थी लेकिन ये प्रतिशत मोदी के समय में हर गाँव में औसतन 47-99% तक घरों में बिजली पहुँचाने तक हुई। बिजली पहुँचाने का मतलब घरों में बल्ब लगाने से नहीं है, उसके लिए अलग लक्ष्य है। गाँव में बिजली आपके प्रयोग हेतु उपलब्ध है, मतलब गाँव तक बिजली पहुँच गई।

18,000 गाँव में अगर तीन गाँव में बिजली नहीं पहुँची, तो प्रतिशत निकाल लीजिए कि कितने प्रतिशत है ये। मैं बता देता हूँ: 0.016% । और अगर छः लाख लिया जाए तो ये प्रतिशत .0005% होता है। जी, मोदी के लिए स्कोप ऑफ़ एरर अब इतना ही है। सौ प्रतिशत बोला तो सौ प्रतिशत होना चाहिए।

रवीश जी का धन्यवाद की उनकी आशा में इतनी भी गलती की गुंजाइश नहीं है। उस हिसाब से उनकी जो रिपोर्टिंग होती है, उसमें तो बारह आना समय वो झूठ और अजेंडा पैडलिंग करते हैं, तो उसका क्या किया जाए?

अब आते हैं मंशा पर। मंशा क्या होनी चाहिए और क्या है। सत्तर साल बाद हर गाँव में बिजली पहुँची ये देश के लिए अच्छी बात है। कुछ गाँवों में नहीं पहुँची इसका मतलब उन गाँवों के अधिकारियों ने गलत सूचना पहुँचाई, या 0.0005% (या चलिए ऐसे सौ गाँव और ले लीजिए, फिर भी 18000 पर भी 0.55% होगा) रह जाने के बावजूद मोदी ने कहा सौ प्रतिशत में पहुँच गया। मतलब मोदी को कहना था कि ‘मितरों! बिजली 99.9995% गाँवों में पहुँच गई!

रवीश जी ने ये बताया ही नहीं कि मोदी के आने पर कितने घरों में कनेक्शन गया। वो बताते तो भांडा फूट जाता, यूपीए का गुणगान जो किया, वो नहीं हो पाता। कितने बीपीएल परिवारों को बिजली मिली, गाँवों में दो घंटे की जगह 18-22 घंटे तक बिजली आ रही है, उसका लेखा-जोखा देना भूल गए। क्योंकि उसमें मोदी को बुरा नहीं दिखा पाएँगे।

वो कहेंगे तो धूर्तों वाली मुस्कान कहाँ से आएगी? तो ये कहते हुए कैसे मुस्कियाएँगे कि जब इतने गाँव जुड़ गए, तो डिमांड भी बढ़ी होगी, उत्पादन भी बढ़ा होगा! जबकि अपने किसी सहायक को कहकर पूछ लेते तो पता चल जाता कि भारत में खपत और उत्पादन दोनों ही बढ़े हैं। लेकिन अंधविरोध में 0.0005% का भी स्कोप हो तो धूर्तों वाली मुस्कान तो बनती है। है कि नहीं? इनको सोना मिल जाए तो कहेंगे कि इसमें धूल के तीन कण चिपके हुए हैं और रवीशभक्त नाचेंगे, “नहीं है, नहीं है, ये सोना बिलकुल नहीं है।”

हे ब्रो! सौ प्रतिशत नहीं हुआ! मोदी झूठा है!

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