रॉय बनाम रावल: द वायर की खोजी पत्रकारिता का मिसिंग लिंक

कुछ लोग द वायर का एक लिंक शेयर कर रहे हैं कि अरुँधति रॉय वाली ख़बर फ़र्ज़ी थी जिस पर परेश रावल ने ट्वीट किया। ये बात और है कि द वायर वालों ने उसी साइट पर, उसी से जुड़ी ख़बर में डाला गया विडियो नहीं दिखाया है। वो ख़बर भी पिछले तीन दिन से चर्चा में है। जब इतनी खोजी पत्रकारिता की तो थोड़ा और मेहनत कर लेते।

अब आपको गूगल पर खोजने से भी ना तो परेश रावल का ट्वीट मिलेगा, ना ही वो ख़बर जो पहले कई वेबसाइट पर थीं, लेकिन अब ख़ाली एक ही जगह है जो कि फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने का बादशाह है

मैंने जो प्रतिक्रिया दी थी वो एक विडियो को लेकर दी थी जिसमें अरुँधति जी बता रही हैं कि कैसे लोकतांत्रिक भारत में आज़ादी के समय से ही ‘परपेचुअल वॉर’, वो भी मिलिट्री के साथ इन इलाक़ों में हो रहा है जिसमें नॉर्थइस्ट के सारे राज्य हैं, हैदराबाद है, पंजाब है, तेलंगाना है, गोवा है, कश्मीर है। ये विडियो आपको यूट्यूब पर मिल जाएगा।

अरुँधति रॉय ने ये भी कहा है कि ये सारे राज्य ऐसे हैं जिनमें या तो ट्राइबल लोग हैं (नॉर्थइस्ट, तेलंगाना) या फिर मुस्लिम (हैदराबाद, कश्मीर), या सिक्ख (पंजाब), या ईसाई (गोवा) हैं, और इन पर अपर कास्ट हिन्दुों द्वारा साज़िश की जा रही है। इतिहास और वर्तमान दोनों को ही लाँघते हुए रॉय साहिबा यहाँ तक कह जाती हैं कि वहाँ मिलिट्री का प्रयोग भारत सरकार अपने ही लोगों पर ऐसे कर रही है जैसे पाकिस्तान भी नहीं करता।

ये विडियो हाल की ही है क्योंकि तेलंगाना का ज़िक्र हो रहा है। इस साइट ने अभी क्यों डाली, या शायद अभी की है पता नहीं। मुझे ये जानना है कि गोवा, पंजाब, हैदराबाद, तेलंगाना में भारतीय सेना की कौन सी टुकड़ियाँ ईसाईयों, सिक्खों, मुसलमानों को दबा रही है? मुझे ये भी जानना है कि आज़ादी के समय से ही ‘परपेचुअल वार’ में रहने वाले कौन से मुसलमानों को कश्मीर से भगा दिया गया?

सामने माइक हो, अजेंडा क्लियर हो तो आदमी बहक जाता है। अरुँधति रॉय का अजेंडा क्लियर है। उनको वामपंथ के लदते दिनों में फड़फड़ाते हुए जोर-जोर से ये चिल्लाना है कि अपर कास्ट हिन्दू मेल पूरे भारत में आतंक मचा रहा है, कोई बचाओ। लेकिन ये झूठ अब नहीं चलेगा। जिन एनजीओ के फ़ंड से आपकी ज्ञानधारा बहती थी वो सब बेचारे बंद हो चुके हैं।

अब आपको ‘ऑ’ करके सुनने वाले ही सभागार में बैठकर ताली पीटते हुए लोगों का ही सहारा है जो कि फेसबुक पर अपडेट मारने के लिए ऐसे आयोजनों में जाते हैं।

इनको ना तो भारत का इतिहास पता है ना ही वर्तमान कि नागालैण्ड इंग्लैंड के बग़ल में है कि कहाँ! तो आप ऐसे ही ज्ञान बाँटते रहिए कि आर्मी गोवा में ईसाईयों से लड़ रही है, पंजाब में सिक्खों से, तेलंगाना में आदिवासियों से, हैदराबाद में मुसलमानों से। लोग ताली पीटते रहेंगे।

द वायर खोजी पत्रकारिता करता रहेगा लेकिन लिंक में वो विडियो नहीं डालेगा। बिना परेश रावल से पूछे कि उसने ट्वीट किया था वो जिस ख़बर को लेकर था वो यही है, या पोस्टकार्ड न्यूज़ साइट वाले ख़बर का विडियो भी उसने देखा था, द वायर अपनी ऑल्टरनेटिव जर्नलिज़्म करता रहेगा। ये बात और है कि सिर्फ टेक्स्ट ही डालेगा फेक न्यूज़ साइट से, विडियो नहीं। काहे कि विडियो डालने से धर लिया जाएगा।

कसौल के वीड का ज्वाइंट बनाईए और खोजी पत्रकारिता के नाम पर लहरिया लूटिए।

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