नारी सम्मान और समान अधिकार की लड़ाई है तलाक़, हलाला, बहुविवाह की मुख़ालफ़त

क्या कारण है कि ऐसे पर्सनल लॉ को डिफ़ेंड करने वाले हमेशा मर्द ही होते हैं? क्या कारण है कि ऐसे पर्सनल लॉ वाले तमाम बोर्ड में महिलाएँ दिखती तक नहीं? टीवी के प्राइम टाइम शो में कितनी जगह बिना दाढ़ी और टोपी वाला मुसलमान दिखता है, बुरक़े में ही सही?

नसीर साहब, इस्लाम पर फ़िल्म इसलिए नहीं बन सकती…

नसीरूद्दीन शाह ने कहा है कि ‘इस्लाम पर फ़िल्म बनाने की हिम्मत नहीं वॉलीवुड के फ़िल्मकारों में।’ मैं उन्हीं से ये जानना चाहता हूँ कि जिस देश में वंदे मातरम् गाने पर बवाल है, धोबी को धोबी कहने पर बवाल है, और क्रिटिसिज्म के नाम पर कबीर का ‘ता चढ़ी मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा […]