जेएनयू चुनाव: ‘ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा’ से ‘रंग दे तू मोहे गेरूआ’

लेफ़्ट यूनिटी अपनी लालिमा के साथ अस्तगामी है। ये बात और है कि एक मज़बूत विपक्ष की कमी इस देश को तीन साल से खल रही है।