प्राइम टाइम 30: अगले दंगों के ख़ून से पत्रकारों, बुद्धिजीवियों के हाथ सने होंगे

इन दोगले पत्रकारों को नकारिये जो मरने वाले का धर्म तलाश कर प्राइम टाइम में आँकड़े बताते हैं। इन बुद्धिजीवियों से बचिए जो टट्टी के रंग में जाति खोजते हैं।

मानवता, दंगे और ‘कम्यूनल दंगे’

काँग्रेस वाले दंगे जो होते हैं, उसमें मानवता नहीं मरती। वो कम्यूनल नहीं है। क्योंकि, पहली बात, मानवता को दंगे का पता चल जाता है और वो कुछ दिनों के लिए कहीं छुप जाती है और उसकी मौत नहीं होती और ना ही उसकी आँखो का पानी कोई देख पाता है।