पात्रों पर चर्चा: चुनाव, रचना, विकास साहित्य की विधाओं के संदर्भ में

सबसे ज़रूरी बात ये है कि पात्र हमेशा हमारे इर्द गिर्द होते हैं। उन्हीं से आप नए पात्र गढ़ते हैं। विशुद्ध कल्पना जैसी कोई चीज नहीं होती। हमारी कल्पना वास्तविकताओं के हिस्सों को इधर-उधर जोड़ने और तोड़ने से जन्म लेती है।

पत्र: कहानी क्या है, निहायत ज़रूरियात क्या हैं, आपकी पहचान क्या है

आपके मन में जो भी चल रहा हो, आपने अपने अनुभवों को जिस भी परिस्थिति में कल्पनाशीलता से रखा है, वही अभिव्यक्ति है। उसमें मसाला मत डालिए। मसाला हमेशा फ़ैक्ट्री से आता है और रेसिपी में इस्तेमाल होता है। आपके पास जो मसाला है, वो सबके पास है।

उनके नाम जो कहानी कहना चाहते हैं फ़िल्म बनाकर

ये पोस्ट मेरे उन मित्रों और छात्रों के लिए हैं जो फ़िल्मकार बनना चाहते हैं। ख़ासकर उनके लिए जो कहानी कहना चाहते हैं, लिखना चाहते हैं और फिर डायरेक्ट करना चाहते हैं।  बीस से पच्चीस साल के होने का दौर वो दौर होता है जब हर कोई कुछ रिवॉल्यूशनरी या ‘हटके’ करना चाहता है। हर […]

कहानी क्या है, कैसे लिखें, क्या नहीं लिखें

शब्दों और वाक्यों को टाईप करने से कहानी नहीं होती, कहानी बुलाती है कि पढो, भगाती नहीं।