एक बेकार, नकारा विपक्ष लोकतंत्र को बर्बाद करने की क्षमता रखता है

अगर विपक्ष इस बात पर फोकस्ड है कि किसने अपनी पत्नी से बात नहीं की, किसका बाप किसको छोड़कर चला गया, तो फिर चुनाव महज़ औपचारिक कार्यक्रम बनकर सिमट जाएँगे, जो होंगे ज़रूर पर उसका परिणाम कुछ भी नहीं होगा।

कर्णाटक चुनाव: जब अनैतिक लोग नैतिकता की आशा करने लगें तो समझो ग़ज़ल हुई

आप जो माँग रहे हैं वो धूर्तता है। आपकी बेचैनी दिखती है क्योंकि आप जिस विचारधारा को पालते रहे हैं, उसकी सारी मक्कारी जनता पकड़ रही है। आपकी मक्कारी हमारे जैसे लोग पकड़ रहे हैं क्योंकि आपको विकास या आदर्श से कोई लेना-देना नहीं है। आप कार के पीछे भागते गली के वो कुत्ते हैं जिसे ये भी नहीं पता कि उसे कार से उतरकर आदमी पूछ ले कि क्यों भौंक रहा है तो वो क्या जवाब देगा। और तो और, उसे दो बार पुचकारकर बिस्किट फेंक देगा तो वो कार में बैठकर पैर चाटता उसके घर पहुँच जाएगा।

अय्यर अभिजात्य रंगभेद के पर्याय हैं, ये ‘उड़ता तीर’ राहुल की जनेऊ काट देगा

आप गाली दीजिएगा, वो उसे कोट पर मेडल बनाकर चिपका लेगा, और कहता फिरेगा कि देखो ये कितना बड़ा अचीवमेंट है।

नया नैरेटिव: 3500 VVPAT मशीन टेस्ट में फ़ेल

ईवीएम पर जब सबका मुँह बंद हो चुका है तो अब ज्ञानपुँज वीवीपैट पर सवाल उठा रहे हैं। जबकि वीवीपैट सिर्फ स्लिप देती है, आँकड़े ईवीएम में ही रहते हैं।

‘सपने में भी नहीं सोचा था’ से ‘ई तो साला होना ही था’ की ओर

ये बुज़ुर्गों का गरीब जेनरेशन कब खपेगा? सब के सब यही कहते हैं कि नदी तैर कर पढ़ने जाते थे! मिट्टी के घर में रहते थे! भले ही नदी में भैंस की पीठ पर चढ़कर जाते हों और दूसरों के बग़ीचे से आम तोड़ते हों, लेकिन इनकी उम्र का बचा कौन होगा जो कन्फर्म करने जाए!

दिल्ली चुनाव: एंकरों का चुनावी घाघरा तैयार हो रहा है

एंकरगण सूट पहनकर आएँगे लेकिन रोज़ की तरह वो कुर्सी पर बैठकर ज्ञान नहीं बाँटेंगे। दस तारीख़ को सबकुछ खड़े खड़े होगा। कौन जीतेगा, कौन हारेगा हमको नहीं पता… हमको कुछ नहीं पता…