दीवाली पर 50 लाख पटाखे: आख़िर सुप्रीम कोर्ट ऐसे वाहियात फ़ैसले/निर्देश जारी कैसे करता है?

जज साहब, इमेज बिल्डिंग मत कीजिए, जुडिशरी को सुधारिए क्योंकि लोकतंत्र के इस स्तंभ पर से भी लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। ये फर्जी के जजमेंट मत पास कीजिए जो लागू ही नहीं हो सकते।

गाँव की दिवाली, गिफ़्ट, पटाखेबाजी और माताएँ

पटाखा फोड़ते देख मातओं के आँखों की ख़ुशी देखकर लगता है कि वही फोड़ रही हों। बीच बीच में ‘अभोगिया, सरधुआ, जुअनपिट्टा’ जैसी गालियाँ भी बरसाती हैं जब बच्चे रिस्क लेने लगते हैं।