उनके नाम जिन्होंने नारीवाद को पीरियड्स के धब्बों के फोटो तक सीमित कर दिया है

ऐसे लोग ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर, फेसबुक आदि पर ही कैम्पेन चलाते हैं और उनके लिए वो रास्ता सबसे सही होता है जो सबसे छोटा होता है।

रक्षाबंधन का इतिहास: फ़र्ज़ी नारीवादियों के कुतर्कों के नाम

पुराणों के हर प्रसंग में स्त्रियों ने अपनी शक्ति से अपने भाई, पति या समाज की रक्षा की है। भाई की कलाई पर बँधी राखी उसकी रक्षा के लिए होती है ना कि वो बहन की रक्षा का वचन देता कहीं भी दिखता है। बहन की रक्षा भाई के लिए उतनी ही सहज प्रक्रिया है, जितनी सहज बात बहन द्वारा भाई को मुसीबत में देखकर मदद करने की।

लिप्सटिक वाले सपने: हर रोज़ी का द्वंद्व, सब के होंठ गुलाबी हैं, सब बुर्क़े में क़ैद

सबका नाम रोज़ी है। सब के होंठ गुलाबी हैं, सब बुर्क़े में क़ैद है। सबको बाहर पंख फैलाने है। सबका अपना आकाश है। सबके पंखों का रंग अलग है।

लिप्सटिक नारीवाद: फ़ैशन के दौर में गारंटी की इच्छा ना करें

क्या पूरे नारीवाद का विमर्श अब इतने पर आकर गिर गया है कि कोई सिंदूर क्यों लगाती है, बिंदी क्यों चिपकाती है, ब्रा क्यों पहनती है?

दिल्ली मेट्रो और आंटी का लिप्स्टिक नारीवाद: आप उतने भी वरिष्ठ नहीं हैं!  

हमारे एक मित्र हैं फेसबुक पर। उन्होंने एक वाक़या अपनी वॉल पर लिखा है कि किस तरह से उनके सत्तर साल के पिता और उनके एक बुज़ुर्ग मित्र को, एक महिला ने ‘वरिष्ठ नागरिक’ वाले सीट पर ये कहकर बैठने नहीं दिया, “आप उतने भी वरिष्ठ नहीं हैं।” हमारे मित्र ने संस्कारों के दायरे में […]