मुश्किल में फँसे दिल, बिज़नेस और देशभक्ति का मॉकटेल

आप अपना बिज़नेस देख रहे हैं जिसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं। सबको हक़ है। लेकिन इसके लिए देशभक्ति और मानवता का रीमिक्स राग मत अलापिए। अनुराग कश्यप को, प्रियंका चोपड़ा को, बरखा दत्त को, सगारिका घोष को… सबको हक़ है अपनी बात कहने का। लेकिन आप जिस जगह पर हैं वहाँ से मोदी को टैग करके जनता को उल्लू क्यों बना रहे हैं कि सरकार ने ऐसा किया? सरकार ने तो कभी कुछ कहा ही नहीं।

फ़वाद और माहिरा ख़ान को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलना ही चाहिए

इन दोनों को शांति को नोबेल दे देना चाहिए। क्योंकि इतना सोचने समझने के बाद इन्हें लगा कि उरी हमला जो भारत पर हुआ है वो एक देश के ख़िलाफ़ नहीं, मानवता के ख़िलाफ़ हमला है। और इन दोनों के पोस्ट टाइमलेस, कालातीत, हैं। समय से परे इन्हें आप किसी भी दिन उठाकर पढ़ लो रेलेवेंट लगते हैं।

मोदी को देशहित में गाली सुननी चाहिए, बुद्धिपिशाचों का नया तर्क

तुम्हें सिर्फ गाली देने से मतलब है। तुम्हें च्यूंटी काटने से मतलब है, तुम्हें किसी को भक्त कहने से मतलब है और फिर अपने ही सीमित ज्ञान के दंभ पर खुद को सबसे ज्ञानी मानते हुए, दूसरे की हर बात को तुच्छ मानते हुए हँसने से मतलब है।

सर्जिकल स्ट्राइक का दूसरा दिन: अपनी ख़ुशी और उन्माद में फ़र्क़ कीजिए

बिना टैंक उतारे, बिना अपनी सेना के जवानों को खोए भी वो सब हासिल किया जा सकता है जो अभी हमारे लक्ष्य पर है। इसीलिए, ख़ुश रहिए, उन्मादित मत होइए।

35-70 आतंकी को मारने में वक़्त तो लगा पर पाकिस्तान बिलबिला गया है!

बयानों के लगातार बदलने से, उसमें एकरूपता ना होने से ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान कितना हिला हुआ है। भारत सरकार ने ‘साम-दाम-दंड-भेद’ की चारों नीतियाँ अपनाईं और चारों स्तर पर सफलता पाई।

पाकिस्तानी कलाकारों को यहाँ से भगाना जायज है क्योंकि ये बेग़ैरत हैं

अगर ग़ुलाम अली सीमाओं से परे हैं तो फिर आतंक के ख़िलाफ़ बोलने में मुँह में पान क्यों रख लेते हैं? राहत फतेह अली खान को एक बार तो कहना चाहिए कि जो हो रहा है सही नहीं है। फवाद खान ने क्या देश की आर्मी को कहा है कि अपने देश के आतंकी कैम्प का सफ़ाया करे?

चलो पाकिस्तानियों की कह के लेते हैं, और घुस के मारते हैं! मज़ा आ जाएगा…

जहाँ पाकिस्तान अपने देश में आई बाढ़ के लिए भी भारत को कोसता है, वहाँ क्या धमाके सच में शिया-सुन्नी झड़पों के हिस्से होते हैं? मैं तो अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों का ज्ञाता नहीं हूँ पर मुझे नहीं लगता कि भारत कभी भी चुप बैठता है। हाँ आपको पर्सनली ख़बर नहीं मिलती, वो बात अलग है। लेकिन इस बार लग रहा है कि एक-दो दिन में आपको पता लग जाएगा कि पाकिस्तान में क्या हुआ है।