आत्माओं के एकरूपता की अभिव्यक्ति है प्रेम

ज़रूरी नहीं कि दो ‘परफ़ेक्ट’ लोग ही प्रेम करें या फिर प्रेम में लोग परफ़ेक्ट हो जाते हैं। बिलकुल नहीं। दो बिखरे हुए लोग, दो चोर, दो असफल और गिरे हुए लोग भी प्रेम करने में सक्षम हैं।

भन्ते! वही प्रेम है

लेकिन,
प्रेम शायद मिनैण्डर का रथ है
जिसके अवयवों को नागसेन ने
अलग-अलग हटाकर पूछा था,
“महाराज! क्या ये रथ है?”
“क्या ये रथ है?”
“क्या ये रथ है?”

तुम मिलो मुझे

तुम मिलो मुझे अपने सारे इम्परफेक्शन्स के साथ बिखरे बालों के साथ समंदर को घंटों निहारते हुए दुनिया भर की रेत समेटे जूतों में तुम मिलो मुझे सूरज की लाली अपने चेहरे में लपेटे हुए अलसाई सी सुबह में शांत आवाज़ों को सुनते हुए तुम मिलो मुझे महानगर के पागलपन में किसी शांत कोने में […]