हम बिहारी हैं, दूब, कुचले और पतित भी क्योंकि क्रांति के नाम पर जाति पकड़ते हैं

हमें इसी बात में मज़ा आने लगा है कि हम किसी भी कारखाने को बंद कर सकते हैं जबकि हँसनेवाली बात यह है कि हम वहाँ के मज़दूर हैं, मालिक नहीं। फिर ये गौरव किस बात का?

प्राइम टाइम: बिहार में बहार है, जान लो कि ई नीतिसे कुमार है!

फिलहाल नीतीश कुमार सेकुलर से कम्यूनल होने वाले हैं। आपलोग उसकी तैयारी करें। अचानक से उनके कार्यकाल में हुई राजनैतिक से लेकर सामाजिक और पत्रकार-पेशा-विशेष से संबंधित हत्याओं का ठीकड़ा पता नहीं किसके सर जाएगा। अचानक से उनका कुर्ता सफ़ेद होकर चमकने लगेगा।

बिहार छात्र-दुर्दशा पर आश्चर्य क्यों?

ग़रीबी के कारण सरकारी स्कूलों में अटके बच्चे, जहाँ के शिक्षकों को सैलरी आठ महीने में मिलती है, क्या पढ़ाई करेंगे? उनके सिर्फ फ़ॉर्म भरे जाते हैं।

जिस बिहार को सठियाये काटजू पाकिस्तान को दे रहे हैं, 11% सैनिक उसी राज्य के हैं

आपको ये बात भी याद दिलाना उचित रहेगा कि उड़ी हमले में शहीद होने वालों में तीन बिहार के थे। भारतीय सेना में 11% लोग बिहार के हैं और हर साल एक लाख से ज्यादा बिहारी भारतीय सेना में भर्ती होने की परीक्षा देते हैं।

बिहार के ‘ख़ूनी’ बहार में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या

ख़ैर सलमान की कार तो गूगल कार थी। तो हो सकता है रॉकी भी दिल्ली में होंगे और राजदेव जी ने कहीं रिवाल्वर बाँध दिया हो, और चलने को हुए हों तो ट्रिगर बँधे होने के कारण खिंच गया हो और उनकी मौत हो गई हो। ये लॉजिक ही सही है क्योंकि बिहार में तो बहार है और जो है सो नितीसे कुमार है!