घृणा की खेती करते फेसबुकिया बुद्धिजीवी की फ़र्ज़ी संवेदना

आप ये जताने की भरपूर कोशिश में हैं कि सरकारों ने ‘मॉब लिंचिंग’ का कोई कोर्स शुरु किया है जहाँ से प्लेसमेंट हो रहा है।

इंटेलेक्चुअल लेजिटिमेसी की राह वन-वे होती है

ये अपनी फ़र्ज़ी बुद्धिजीविता में इतने धँस चुके हैं कि मोदी की राजनीति और हिंदू धर्म के प्रति घृणा को खुलकर घृणा कहने में हिचकिचाते हैं। इससे इनको ये डर लगता है कि ये ‘ऑब्जेक्टिव’ नहीं रह जाएँगे। जबकि इन्हें अच्छे से पता है कि इनकी ये ‘आलोचना’ कितनी बायस्ड और मौक़ापरस्त है।

NIT श्रीनगर पर बुद्धिजीवियों की ख़ामोशी बहुत कुछ कहती है

छोटी सी ज़िंदगी है मेरी और बहुत कम अनुभव है चीजों का। लेकिन तीस साल की उम्र में, आज तक, मैंने ये नहीं सोचा था, या कभी ऐसा लगा नहीं था कि हम उस दौर में भी होंगे जब तिरंगा फहराने पर एक राज्य सरकार की पुलिस छात्रों को पीटेगी, और कल तक छात्रहित की […]