कर्णाटक चुनाव: जब अनैतिक लोग नैतिकता की आशा करने लगें तो समझो ग़ज़ल हुई

आप जो माँग रहे हैं वो धूर्तता है। आपकी बेचैनी दिखती है क्योंकि आप जिस विचारधारा को पालते रहे हैं, उसकी सारी मक्कारी जनता पकड़ रही है। आपकी मक्कारी हमारे जैसे लोग पकड़ रहे हैं क्योंकि आपको विकास या आदर्श से कोई लेना-देना नहीं है। आप कार के पीछे भागते गली के वो कुत्ते हैं जिसे ये भी नहीं पता कि उसे कार से उतरकर आदमी पूछ ले कि क्यों भौंक रहा है तो वो क्या जवाब देगा। और तो और, उसे दो बार पुचकारकर बिस्किट फेंक देगा तो वो कार में बैठकर पैर चाटता उसके घर पहुँच जाएगा।

भारत के हिन्दुओ, प्रोपेगेंडा का जवाब देना कब सीखोगे?

ये एक अघोषित युद्ध है, और मैं अपने धर्म को त्रिशूल में लिपटे कॉन्डोम और लिंग में घुसे भगवा झंडे के स्तर तक गिरता नहीं देखना चाहता।

हर तीसरे दिन उठते जातीय बवंडरों का हासिल क्या है?

ये सारी बातें हुई नहीं, व्यवस्थित तरीक़े से हुईं। इसमें दुर्घटना को मुद्दा बनाया गया। डर का माहौल बनाया जाता रहा, ये कहकर कि डर का माहौल है। ये इतनी बार कहा गया, कि जो अपने बग़ल के गाँव में ईदगाह तक जाता था, वो अपने गाँव में मुसलमानों को दुर्गा पूजा के मेले में शक की निगाह से देखने लगा।

वामपंथियों का चुनावी विश्लेषण: अंधविरोध, घटिया और चिरकुटई से परिपूर्ण

निकाय और पंचायत चुनाव राष्ट्रीय स्तर तक के सफ़र तक पहुँचने की पहली सीढ़ी है, वहाँ लोग पार्टी नहीं, अपने बूते पर चुनाव लड़ते हैं। ये उनके लिए स्क्रीनिंग टेस्ट की तरह होता है कि हमने तो खुद को साबित कर दिया, अब आप देख लो कि अगले चुनावों में हमें अपनी पार्टी में रखोगे कि नहीं।

नया नैरेटिव: 3500 VVPAT मशीन टेस्ट में फ़ेल

ईवीएम पर जब सबका मुँह बंद हो चुका है तो अब ज्ञानपुँज वीवीपैट पर सवाल उठा रहे हैं। जबकि वीवीपैट सिर्फ स्लिप देती है, आँकड़े ईवीएम में ही रहते हैं।

दिशाहीन विपक्ष, प्रतिक्रियावादी मीडिया, बेकार बातों में उलझे बुद्धिजीवी भाजपा को जिताएँगे

आपकी हार का मतलब है कि आपने एक सशक्त विपक्ष, समझदार विरोधी और देशहित में सोचने वाले बुद्धिजीवी की भूमिका नहीं निभाई।

प्राइम टाइम: बिहार में बहार है, जान लो कि ई नीतिसे कुमार है!

फिलहाल नीतीश कुमार सेकुलर से कम्यूनल होने वाले हैं। आपलोग उसकी तैयारी करें। अचानक से उनके कार्यकाल में हुई राजनैतिक से लेकर सामाजिक और पत्रकार-पेशा-विशेष से संबंधित हत्याओं का ठीकड़ा पता नहीं किसके सर जाएगा। अचानक से उनका कुर्ता सफ़ेद होकर चमकने लगेगा।

अवैध बूचड़खाने, योगी सरकार, इमोशनल ब्लैकमेल और कानून

ये तो वही तर्क हो गया कि मेरा पचास हज़ार कमाने वाला लड़का बलात्कारी निकला तो सरकार उसे जेल में डालने से पहले मेरा घर चलाने की व्यवस्था कर दे! सरकार ग़ैरक़ानूनी धंधा करने वालों को कोई नौकरी नहीं देती, ना ही ऐसा करने की ज़रूरत है। वो जुर्माना भरें, सज़ा काटें और फिर क़ानूनी प्रक्रिया के तहत नई दुकान खोलें।

योगी आदित्यनाथ एक स्टेटमेण्ट है कुछ पॉलिसी के लिए, कुछ पार्टियों और सरकारों के लिए

दिक़्क़त तब होगी जब वो गुण्डागर्दी को बढ़ावा देगा, दंगे कराएगा और अपने जूते हवाई जहाज़ से मँगवाएगा।

मुसलमान उम्मीदवारों, उनके हिमायती नेताओं ने क्या उखाड़ कर दे दिया मुसलमानों को?

मुसलमानों के विकास की राह को रोड़ा स्वयं मुसलमान है। जब तक कुंठित होकर कठमुल्लों के चक्कर में मदरसों में पढ़ोगे, जब तक इस फ़िराक़ में रहोगे कि कैसे हिन्दुओं को बढ़ने से रोक दिया जाय, जब तक वोट इस कारण दोगे कि भाजपा को हराना है, तब तक तुम्हें तुम्हारे ही चुने नेता ठगते रहेंगे।