3000 करोड़ एक मूर्ति के लिए, 3600 करोड़ दूसरी के लिए! कितना ज़रूरी है ये सब?

भुलाए गए हर नायक और नायिकाओं की मूर्तियाँ, उनके नाम पर इतिहास के पन्ने और उनके योगदान की गाथाएँ हर भारतीय को जाननी चाहिए। न कि उनकी जिन्होंने यहाँ रहकर यहाँ की लड़कियों का बलात्कार किया, मंदिरों को बर्बाद किया, पुस्तकालयों में आग लगाए, और गाँवों में सामूहिक नरसंहार किए।

फेसबुकिया अर्थशास्त्रियों के नाम

भारत के पढ़ लिख कर बनराए (यानि पढलिख कर बंदर समान हो गए, डिवॉल्यूशन) हुए फेसबुकिया बुद्धिजीवियों की समस्या ये है कि उन्हें हर चीज में समस्या दिखती है। समस्या दिखने तक तो ठीक है। उसपर चटपटे कमेंट लिखने तक भी ठीक है लेकिन कोई भी चाहे झंडाधारी भक्त हों, या जेएनयू के गंगा ढाबे […]