अंकित की मौत ऑनर किलिंग नहीं, मुसलमानों द्वारा की गई नृशंस हत्या है

मैं उस मुसलमान से क्यों न डरूँ जो चंदन, नारंग, पुजारी, रवीन्द्र, अंकित की भीड़ हत्या पर चुप रहता है और अखलाख तथा जुनैद पर फेसबुक पर दिन में दस पोस्ट डालता है ये कहते हुए कि वो बहुत डरा हुआ है?

हामिद अंसारी मुसलमानों के नेता नहीं, अंजेडाबाजों का मोहरा बनकर गए

डिसाइड कर लो कि ‘असुरक्षित महसूस कर रहे हो’ या परशुराम टाइप ‘पंद्रह मिनट के लिए पुलिस के हटते ही हिन्दुओं को काटकर हिन्दुस्तान को इस्लामिस्तान बना लोगे’।

मुसलमान उम्मीदवारों, उनके हिमायती नेताओं ने क्या उखाड़ कर दे दिया मुसलमानों को?

मुसलमानों के विकास की राह को रोड़ा स्वयं मुसलमान है। जब तक कुंठित होकर कठमुल्लों के चक्कर में मदरसों में पढ़ोगे, जब तक इस फ़िराक़ में रहोगे कि कैसे हिन्दुओं को बढ़ने से रोक दिया जाय, जब तक वोट इस कारण दोगे कि भाजपा को हराना है, तब तक तुम्हें तुम्हारे ही चुने नेता ठगते रहेंगे।

गोमाँस ईटिंग फ़ेस्टीवल, बुद्धिजीविता, हिंदू-मुसलमान ब्ला, ब्ला, ब्ला

मैं क्या करता हूँ अजान सुनकर? एडजस्ट। क्यों? क्योंकि हिंदू धर्म सर्वसमावेशी है और बर्दाश्त करना सिखाता है। दूसरे धर्म और मत को जगह देना ही हिंदुत्व है। लेकिन आप ये सोच कर बैठ जाएँ कि आप जानबूझ कर किसी को उकसाएँगे और वो बर्दाश्त करता रहेगा तो ये आपकी भूल है।