सुनो रे पपुआ, संसद तुम्हारे बाप, दादी या परनाना की नहीं

घोटालों को नॉर्मलाइज़ करनेवाली पार्टी आजकल विथड्रावल सिम्पटम से जूझ रही है क्योंकि ‘जो घोटाले करते नहीं थे, उनसे घोटाले ‘हो जाते’ थे,’ उनका घोटालों से दूर होना कष्टदायक तो है ही।

एक बेकार, नकारा विपक्ष लोकतंत्र को बर्बाद करने की क्षमता रखता है

अगर विपक्ष इस बात पर फोकस्ड है कि किसने अपनी पत्नी से बात नहीं की, किसका बाप किसको छोड़कर चला गया, तो फिर चुनाव महज़ औपचारिक कार्यक्रम बनकर सिमट जाएँगे, जो होंगे ज़रूर पर उसका परिणाम कुछ भी नहीं होगा।

अय्यर अभिजात्य रंगभेद के पर्याय हैं, ये ‘उड़ता तीर’ राहुल की जनेऊ काट देगा

आप गाली दीजिएगा, वो उसे कोट पर मेडल बनाकर चिपका लेगा, और कहता फिरेगा कि देखो ये कितना बड़ा अचीवमेंट है।

प्रिय कॉन्ग्रेस, चुनाव जीतने हैं तो बिहेव लाइक अ नेशनल पार्टी

‘राहुल’ को ‘राज’ का हुलिया देकर ‘हाय ब्रो, आप एम कूल’ कहने से पिक्चर हिट नहीं होगी।