प्राइम टाइम: मुंबई ‘स्पिरिट’ से भीगीं मशालें फेसबुक पर ही जलती हैं!

स्पिरिट का नाम लेकर अपने काम पर निकल लेना बहादुरी नहीं, मजबूरी है। और मजबूर लोग आंदोलन नहीं करते। वो मेरी तरह फेसबुक पर पोस्ट लिखकर सो जाते हैं।

सुरेश प्रभु जी, रेल मंत्रालय सँभालने की जगह आम आदमी की जेब काटना बंद कीजिए

आम आदमी ना तो ट्विटर लेकर ट्रेन में बैठता है ना ही उसके पास इतने पैसे हैं कि एक बाप के इलाज के लिए वो उड़ीसा से दिल्ली को निकले तो टिकट ख़रीदने में ही उसकी जान निकल जाए। आम आदमी को आपके ट्विटर पंचायत से कोई लेना देना नहीं है।